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Supercomputer क्या है? दुनिया के टॉप सुपर कम्प्यूटर्स और भारत

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आज Supercomputers को लेकर दुनियाभर में हौड़ मची हुई है। हर देश चाहता है कि दुनिया का सबसे तेज सुपर कम्प्यूटर उसी के पास हो। लेकिन सवाल यह है कि यह सुपर कम्प्यूटर आखिर है क्या? और यह क्या काम आता है? साथ ही इसमें ऐसी कौनसी खास बात है, जो इसके पीछे पूरी दुनिया पागल हुए जा रही है? क्या सुपर कम्प्यूटर का होना किसी देश के लिए शान की बात है? अगर हाँ तो इस वक्त दुनिया का सबसे तेज Supercomputer किसके पास है? और भारत इस रेस में कहाँ खड़ा है? आइए, जानते हैं।

Supercomputer

आज तक इंसान ने अनगिनत मशीनें बनाई हैं। लेकिन Computer उनमें से सबसे क्रांतिकारी मशीन है। इस मशीन ने हमारे जीवन को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। आज के दिन ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जहाँ कम्प्यूटर का इस्तेमाल न होता हो। यहाँ तक कि Education से लेकर Health Care और Banking से लेकर Space तक हर जगह कम्प्यूटर का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन कम्प्यूटर की भी एक सीमा है।

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दरअसल कई ऐसे काम हैं, जिन्हें साधारण कम्प्यूटर नहीं कर सकता। इसीलिए ऐसे कामों को करने के लिए Supercomputer की जरूरत पड़ती है। क्योंकि सुपर कम्प्यूटर, साधारण कम्प्यूटर से कई गुना तेज व शक्तिशाली होता है। इसीलिए वह ऐसे काम भी आसानी से कर लेता है, जो एक साधारण कम्प्यूटर नहीं कर सकता। लेकिन सवाल यह है कि यह सुपरकम्प्यूटर आखिर होता क्या है? आइए, जानते हैं।

Supercomputer क्या है?

सुपर कम्प्यूटर का मतलब ऐसे कम्प्यूटर से है। जो अत्याधुनिक तकनीकी से लैस हो, गणना-शक्ति में सबसे तेज हो, और 500 Mega FLOPS की क्षमता से कार्य करता हो। यानि कि सुपरकम्प्यूटर सबसे तेज और सबसे शक्तिशाली कम्प्यूटर होता है, जो Data को बहुत ही तेजी से Process करता है। यह साधारण कम्प्यूटर से बहुत आगे होता है। इतना आगे कि जिन गणनाओं को करने में साधारण कम्प्यूटर को सालों लग जाते हैं। उन्हीं गणनाओं को यह चंद सैकण्डों में कर सकता है।

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अगर आसान भाषा में कहें तो सुपरकंप्यूटर एक Advanced और Powerful मशीन है। जो कई सारे Computers का काम एक साथ कर सकती है। सुपर कम्प्यूटर की Performance को FLOPS (Floating Point Operations Per Second) में मापा जाता है। क्योंकि इसकी Performance बहुत ज्यादा होती है। यह एक सैकण्ड में 1,000,000,000 (एक अरब) गणनाऐं कर सकता है।

FLOPS क्या है?

एक साधारण कम्प्यूटर की क्षमता को मापने के लिए MIPS (Million Instructions Per Second) का प्रयोग किया जाता है। लेकिन Supercomputers के लिए यह इकाई बहुत छोटी है। इसीलिए सुपर कम्प्यूटर्स की Computing क्षमता को मापने के लिए FLOPS (Floating Point Operations Per Second) का प्रयोग किया जाता है। FLOPS मापन प्रणाली में निम्न इकाईयों का प्रयोग किया जाता है :-

KflopskiloFLOPS102
MflopsmegaFLOPS106
GflopsgigaFLOPS109
TflopsteraFLOPS1012
PflopspetaFLOPS1015
EflopsexaFLOPS1018
ZflopszettaFLOPS1021
YflopsyottaFLOPS1024

Supercomputer काम कैसे करता है?

सुपर कम्प्यूटर असल में Parallel Processing के सिद्धांत पर काम करता है। यानि कि समस्या को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर सभी हिस्सों पर एक साथ काम करता है। जिससे कि कम समय में काम पूरा हो जाता है। इसके लिए Supercomputer में हजारों Microprocessors लगे होते हैं, जो एक साथ मिलकर काम करते हैं। इसीलिए इसकी Data Processing Speed काफी ज्यादा होती है। जिसे हैंडल करने के लिए बेहिसाब Storage की जरूरत पड़ती है।

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वहीं एक Basic Computer में श्रृंखलाबद्ध तरीके (Serial Processing) से काम होता है। यानि कि समस्या के सभी हिस्सों पर एक साथ काम न होकर एक के बाद एक चरणबद्ध तरीके से काम होता है। इसीलिए इसमें ज्यादा समय लगता है। जाहिर-सी बात है! अगर किसी काम को अकेला व्यक्ति करेगा तो उसे ज्यादा समय लगेगा। लेकिन उसी काम को 100 लोग मिलकर करेंगे तो वह जल्दी पूरा हो जाएगा। 

यानि कि Basic Computer अकेले व्यक्ति की तरह है, जो एक बार में एक ही काम कर सकता है। लेकिन सुपरकंप्यूटर एक पूरी टीम है। जिसमें हजारों लोग (Microprocessors) शामिल हैं। इसीलिए सुपर कम्प्यूटर बहुत ही तेजी से काम करता है।

Operating System

शायद आप सोच रहे होंगे कि सुपर कम्प्यूटर इतना Advanced और Powerful कम्प्यूटर है। तो जरूर इसमें किसी खास Operating System का इस्तेमाल होता होगा। लेकिन नहीं। Supercomputer भी नॉर्मल Operating Systems पर ही रन करता है। यानि कि जो Operating Systems हमारे नॉर्मल Computers और PCs में इस्तेमाल किए जाते हैं। वही सुपर कम्प्यूटर में इस्तेमाल होते हैं।

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आजकल ज्यादातर Supercomputers Linux Operating System पर Run करते हैं। आपको बताना चाहूँगा कि Linux (लिनक्स) एक Free और Open Source Operating System है। जो काफी पॉपुलर है। इसके अलावा सुपर कम्प्यूटर में CentOS, Bullx SCS, SUSE और Cray Linux Operating System का भी इस्तेमाल किया जाता है।

Supercomputer के कार्य

सुपरकंप्यूटर को छोटे-मोटे कामों में इस्तेमाल नहीं किया जाता। क्योंकि यह काफी खर्चीला होता है। साथ ही इसमेंं कई गुना ऊर्जा की खपत होती है। इसीलिए यह High Performance Scientific Research और वैज्ञानिक प्रयोगों में ही इस्तेमाल किया जाता है। जैसे कि :-

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence)
  • मशीन लर्निंग (Machine Learning)
  • डाटा साइंस (Data Science)
  • खगोलशास्त्र (Astronomy)
  • ब्रह्मांड का अध्ययन (Cosmology)
  • भूगर्भ विज्ञान (Geology)
  • मौसम विज्ञान (Meteorology)
  • जीव विज्ञान (Biology)
  • जेनेटिक रिसर्च (Genetic Research)
  • आणविक अनुसंधान (Molecular Research)
  • क्वांटम भौतिकी (Quantum Physics)
  • जटिल आर्थिक मॉडल (Complex Economic Models)
  • औषधि विज्ञान (Medical Science)

World’s Fastest Supercomputer

क्या आपको पता है कि दुनिया का सबसे तेज सुपर कम्प्यूटर (World’s Fastest Supercomputer) कौनसा है? और वह किस देश के पास है? अगर आपका जवाब Summit है तो आप गलत हैं। क्योंकि जून 2020 के बाद Summit दुनिया का सबसे तेज सुपर कम्प्यूटर नहीं रहा। बल्कि अब Fugaku (जापान) दुनिया का सबसे तेज सुपर कम्प्यूटर है।

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जून 2020 में फुगाकू की Maximum LINPACK Performance 415.5 petaflops और Theoretical Peak Performance 513.8 petaflops दर्ज की गई। लेकिन नवम्बर 2020 के बाद इसे अपग्रेड किया गया। और Processors की संख्या में ईजाफा किया गया। जिसके बाद इसकी Maximum LINPACK Performance 442 petaflops तक पहुंच गई हैं। वहीं अगर Summit की बात करें तो यह 148.6 petaflops की Maximum LINPACK Performance केे साथ दूसरे नम्बर पर है।

Top-10 Supercomputers

अब सवाल यह है कि World’s Top-10 Supercomputers कौन-कौनसे हैं? और वे किस-किस देश के पास हैं? तो मैं आपको बताना चाहूँगा कि सुपर कम्प्यूटर्स की पोजीशन समय-समय पर Change होती रहती है। क्योंकि साल में दो बार (जून और नवम्बर) में दुनिया के TOP500 Supercomputers की लिस्ट जारी होती है। जिसमें सुपर कम्प्यूटर्स की Ranking पूरी तरह बदल जाती है।

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उदाहरण के लिए, जून 2020 से पहले Summit पहले पायदान पर था। लेकिन अब उसकी जगह Fugaku ने ले ली है। फिलहाल Top 10 Supercomputers की लिस्ट में ये 10 सुपर कम्प्यूटर शामिल हैं:- Top 10 Supercomputers in the world (November 2020) के अनुसार :-

  1. Fugaku (Japan)
  2. Summit (USA)
  3. Sierra (USA)
  4. Sunway TaihuLight (China)
  5. Celene (USA)
  6. Tianhe-2A (China)
  7. JUWELS Booster Module (Germany)
  8. HPC5 (Italy)
  9. Frontera (USA)
  10. Dammam-7 (Saudi Arabia)

जैसा कि आप देख सकते हैं कि दुनिया के टॉप-10 सुपर कम्प्यूटर्स की लिस्ट में भारत का एक भी सुपर कम्प्यूटर नहीं है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि भारत के पास सुपर कम्प्यूटर नहीं है। भारत के पास भी कई सारे सुपर कम्प्यूटर्स हैं। आइए, जानते हैं भारत के Top Supercomputers के बारे में।

सुपर कम्प्यूटर्स और भारत

एक वक्त था जब भारत, अमेरिका से सुपर कम्प्यूटर खरीदना चाहता था। मगर अमेरिका ने साफ-साफ मना कर दिया। क्योंकि अमेरिका नहीं चाहता था कि भारत सुपरकम्प्यूटर के मामले में विकसित देशों की बराबरी करे। इसीलिए भारत ने स्वदेशी सुपर कम्प्यूटर विकास प्रोग्राम शुरू किया। और पुणे में C-DAC (Center for Development of Advanced Computing) की स्थापना की।

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श्री विजय भाटकर (Vijay Bhatkar) जी को C-DAC का डायरेक्टर बनाया गया। और इस तरह 1991 में भारत का पहला सुपर कम्प्यूटर Param 8000 बनकर तैयार हुआ। जो उस वक्त दुनिया का दूसरा सबसे तेज सुपर कम्प्यूटर था। इस उपलब्धि ने भारत को Supercomputers की दौड़ में काफी आगे लाकर खड़ा कर दिया। लेकिन इस उपलब्धि के पीछे विजय भाटकर जी का बहुत बड़ा योगदान था। इसीलिए उन्हें भारतीय सुपर कम्प्यूटर का जनक (Father of Indian Supercomputer) कहा जाता है।

कौन हैं Vijay Bhatkar?

विजय भाटकर भारत के जाने-माने शिक्षाविद् और Computer Scientist हैं। उनका पूरा नाम Vijay Pandurang Bhatkar (विजय पाण्डुरंग भाटकर) है। 11 अक्टूबर 1946 को पुणे (महाराष्ट्र) में जन्म हुआ। और 1972 में IIT Delhi से Engineering में PhD की। 1988 में वे C-DAC के डायरेक्टर बने। और भारत के पहले Supercomputer Programme PARAM का नेतृत्व किया। 1991 में उन्होंने भारत का पहला सुपर कम्प्यूटर ‘PARAM 8000‘ बनाकर इतिहास रच दिया।

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Param Supercomputer Programme में उनका अविस्मरणीय योगदान रहा। इसीलिए 2000 में भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया। साथ ही महाराष्ट्र सरकार द्वारा ‘महाराष्ट्र भूषण‘ से सम्मानित किया गया। वहीं 2015 में उन्हें पद्मभूषण से नवाजा गया।

Top-5 Supercomputers of India

आज भारत के पास कई बेहतरीन सुपर कम्प्यूटर्स हैं। यहाँ तक कि दुनिया की TOP100 और TOP500 सुपर कम्प्यूटर्स में की लिस्ट में भी भारत का नाम शामिल है। लेकिन अगर भारत के टॉप सुपर कम्प्यूटर्स की बात करें। तो ये हैं India’s Top-5 Supercomputers :-

  1. PARAM-Siddhi AI (परम-सिद्धि एआई)
  2. Pratyush (प्रत्यूष)
  3. Mihir (मिहिर)
  4. Sahasra (सहस्त्र)
  5. Aaditya (आदित्य)

नवम्बर 2020 में जारी TOP500 Supercomputers की लिस्ट में भारत के तीन सुपर कम्प्यूटर्स शामिल हैं। इस लिस्ट में PARAM-Siddhi AI ने 62वीं, Pratyush ने 77वीं, और Mihir ने 144वीं रैंक हासिल की। यानि कि PARAM-Siddhi AI इस वक़्त भारत का सबसे तेज सुपर कंप्यूटर (The Fastest Supercomputer of India) है।

Supercomputer Manufacturers

अब सवाल यह है कि सुपरकम्प्यूटर को बनाता कौन है? तो इस काम में कई सारी कंपनियाँ शामिल हैं। जैसे कि IBM, Cray Inc., NEC, HP, SGI, Bull, RSC Group, Dell, Intel, Fujitsu, Megware, NUDT, Netweb Technologies, Acer Group और भी बहुत सारी। लेकिन IBM, HP, Cray, SGI और Bull इस क्षेत्र की सबसे बड़ी खिलाड़ी हैं। और ज्यादातर सुपर कम्प्यूटर्स इन्हीं के हैं।

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वहीं अगर भारत की बात करें, तो भारत में इस वक्त Netweb Technologies और WIPRO इस क्षेत्र में काम कर रही हैं। फिलहाल इन दोनों कंपनियों ने 1-1 सुपर कम्प्यूटर का निर्माण किया है। और Netweb Technologies भारत की पहली ऐसी कंपनी है, जिसने बिना किसी की मदद के खुद सुपर कम्प्यूटर का निर्माण किया है। उम्मीद है, आने वाले समय में भारत ज्यादा से ज्यादा स्वदेशी सुपरकम्प्यूटर्स का निर्माण करेगा।

Supercomputer की कीमत

कहीं न कहीं आपके मन में यह सवाल जरूर घूम रहा होगा कि आखिर एक Supercomputer की कीमत कितनी होती होगी? क्या हमारे लिए सुपर कम्प्यूटर खरीदना मुमकिन है? तो इसका जवाब है – नहीं। क्योंकि सुपरकंप्यूटर की कीमत इतनी ज्यादा होती है कि इसे खरीदने में सरकारों तक को पसीना आ जाता है।

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अगर औसतन देखें तो एक सुपर कम्प्यूटर्स की कीमत 100 मिलियन डॉलर से लेकर 300 मिलियन डॉलर के बीच होती है। यानि कि करीब 7 अरब रूपये से लेकर 21 अरब रूपये के बीच। लेकिन किसी Particular सुपरकम्प्यूटर की कीमत कितनी होगी? यह उसकी Performance पर निर्भर करता है। यानि कि जिस सुपरकम्प्यूटर की क्षमता जितने ज्यादा FLOPS (Floating Point Operations Per Second) होगी। वह उतना ही महंगा होगा।

सुपर कम्प्यूटर का रखरखाव

आमतौर पर सुपर कम्प्यूटर्स की कीमत काफी ज्यादा होती है। लेकिन कीमत से ज्यादा खर्चा इनके रखरखाव पर आता है। क्योंकि सुपरकंप्यूटर बहुत ही महंगे और संवेदनशील होते है। इसीलिए इन्हें रखने के लिए विशेष कक्ष की व्यवस्था करनी पड़ती है। जिसे ठण्डा रखने के लिए काफी जतन करने पड़ते हैं। इसके अलावा एक सुपर कम्प्यूटर साल भर में करीब 7 मिलियन डॉलर की बिजली खा जाता है। यानि कि करीब 50 करोड़ रूपये की बिजली।

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इतना ही नहीं, एक सुपर कम्प्यूटर की Cooling व्यवस्था में लगभग 5 से 6 मिलियन डॉलर की सालाना बिजली खर्च हो जाती है। साथ ही इसकी साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था में भी अच्छा-खासा पैसा खर्च होता है। यानि कि सुपर कम्प्यूटर की Maintenance बहुत महंगी पड़ती है।

सुपरकम्प्यूटर : सारांश

आज हम धरती पर बैठे-बैठे लाखों प्रकाश वर्ष दूर मौजूद तारों की दूरी, आयतन, भार और तापमान पता कर सकते हैं। बिना परमाणु हथियार चलाये उनके नुकसान का आंकलन कर सकते हैं। मानव शरीर के अंदर झांककर कई असाध्य रोगों का ईलाज ढूँढ़ सकते हैं। यहाँ तक कि मौसम के बारे में भविष्यवाणी सकते हैं। लेकिन ये सारे काम सुपर-कम्प्यूटर के बिना संभव नहीं हैं।

उम्मीद है इस आर्टिकल के जरिए आपको Supercomputer Kya Hai? और यह क्या काम आता है? इस विषय में काफी उपयोगी जानकारी मिली होगी। साथ ही World’s Top-10 Supercomputers और India’s Top-5 Supercomputers के बारे में भी काफी कुछ जानने को मिला होगा। अगर यह आर्टिकल आपको पसंद आया तो इसे Like और Share कीजिए। और ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारियों के लिए ‘टेकसेवी डॉट कॉम’ को Subscribe कर लीजिए। ताकि जब भी हम कोई नया आर्टिकल पब्लिश करें, आपको उसका Notification मिल जाए।

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