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Developer Options क्या है? इसे कैसे Use करें? टॉप फीचर्स

  • Meghraj Munshi 
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अगर आप Android फोन इस्तेमाल करते हैं तो आपने Developer Options का नाम जरूर सुना होगा। और कभी न कभी अपने फोन की सैटिंग्स में इस ऑप्शन को देखा भी होगा। लेकिन क्या आपको पता है कि यह Developer Options है क्या? और हमारे फोन में इसका क्या उपयोग है? नहीं मालूम? चलो कोई बात नहीं। क्योंकि आज के इस आर्टिकल में हम Developer Options के बारे में ही बात करने वाले है। तो अगर आप जानना चाहते हैं कि यह क्या है? और इसका क्या उपयोग है? साथ ही इसके अन्दर कौन-कौनसे Options हैं और वे क्या काम आते हैं? तो इस आर्टिकल को पूरा पढ़िए।

Developer Options क्या है?

डेवलेपर ऑप्शन्स कोई एक ऑप्शन नहीं है, बल्कि यह बहुत-से ऑप्शन का एक समूह (Group of options) है, जिसमें Developers के लिए बहुत-से Advanced ऑप्शन्स दिए गए हैंं। ये Options फोन को कंट्रोल करने और कुछ Advanced फीचर्स को Use करने में सहायता करते हैं। इन ऑप्शन्स की मदद से आप अपने फोन की कार्यक्षमता को बढ़ा सकते हैं और उससे सामान्य से ज्यादा काम ले सकते हैं। लेकिन इनमें से ज्यादातर Options को Use करने के लिए आपको उनके बारे में Proper तकनीकी जानकारी होनी जरूरी है।

Developer Options को कैसे Enable करें?

आमतौर पर Developer Options छिपा हुआ रहता है। इसलिए इसे Enable करना पड़ता है। इसे Enable करने के लिए आपको अपने फोन की Settings में जाना है और About Phone पर टैप करना है। उसके बाद Software Information पर टैप करना है और उसके बाद Build Number पर 7 बार लगातार टैप करना है, आपका Developer Options इनेबल हो जाएगा। आपको एक मैसेज भी दिखाई देगा कि “Developer mode has been enabled.” साथ ही फोन की सैटिंग्स में एक नया ऑप्शन जुड़ जाएगा Developer Options के नाम से। बस इसी में आपको सारे डेवलेपर ऑप्शन्स मिलेंगे।

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अगर आप Xiaomi का फोन इस्तेमाल करते हैं तो आपको Settings में जाकर About Phone पर टैप करना है और यहाँ आपको MIUI Version पर लगातार 7 बार टैप करना है, Developer Options इनेबल हो जाएगा। रही बात ऑप्शन की तो यह आपको Additional Settings में मिलेगा। वहीं स्टॉक एंड्रॉयड में यह System के अंदर Advanced सैटिंग्स में मिलेगा। इसी तरह बाकी कंपनियों के फोन्स में भी यह कहीं न कहीं जरूर मिल जाएगा। अगर न मिले तो Settings में जाकर Search कर लीजिएगा, जरूर मिलेगा। क्योंकि Developer Options हर एंड्रॉयड फोन में होता है, भले ही वह किसी भी कंपनी का हो।

Developer Options में क्या-क्या है?

दरअसल डेवलेपर ऑप्शन्स में बहुत-सारे Options हैं। इनमें मुख्य रूप से System (सिस्टम), Debugging (डिबगिंग), Networking (नेटवर्किंग), Processing (प्रोसेसिंग), Monitoring (मॉनिटरिंग), Hardware (हार्डवेयर), Software (सॉफ्टवेयर), Media (मीडिया), Apps (ऐप्स), Privacy (प्राइवेसी) और Security (सिक्योरिटी) से जुड़ी महत्वपूर्ण सैटिंग्स शामिल है। और एक-एक कैटेगरी में कई सारे ऑप्शन्स हैं।

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जैसे कि अगर Networking की ही बात करें तो इसमें मोबाइल डाटा, ब्लूटूथ, वाईफाई, हॉटस्पॉट, NFC और यूएसबी जैसे ऑप्शन्स मौजूद हैं। कुल मिलाकर Developer Options में ढ़ेर-सारे ऑप्शन्स हैं।

Developer Options का क्या काम है?

आपने देखा होगा कि Developer Options में अनगिनत Options मौजूद हैं। और बहुत-से Options तो ऐसे हैं, जिनका आपने कभी नाम तक नहीं सुना होगा। शायद इसीलिए इन Options को लेकर मन में जिज्ञासा होती है कि आखिर ये हमारे फोन में क्यों दिए गए हैं? और इनका काम क्या है? तो आइए, एक-एक करके जानते हैं कि कौनसा Option क्या काम आता है।

OEM Unlocking

जब आप कोई नया फोन खरीदते हैं तो वह बाई-डिफॉल्ट Lock किया हुआ आता है। यानि कि Phone बनाने वाली कंपनी अपना Software डालने के बाद फोन को लॉक कर देती है ताकि कोई भी अनाधिकृत रूप से फोन के सिस्टम में घुसकर सिस्टम के साथ छेड़छाड़ न कर सके। यह डिवाइस की Security के लिए बहुत जरूरी होता है।

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लेकिन जब आप अपना Phone Root करते हैं तो यह फीचर Bootloader को Unlock करने के काम आता है। और एक बार फोन को अनलॉक करने के बाद आप उसमें कोई भी सॉफ्टवेयर Use कर सकते हैं। क्योंकि तब उस पर कंपनी का कोई नियत्रंण नहीं रहता। साथ ही फोन की गारंटी, वारंटी और सिक्योरिटी सब खत्म हो जाती है।

USB Debugging

यह फीचर फोन को लैपटॉप या कंप्यूटर से कनेक्ट करते वक्त काम आता है। अगर आप यह सोच रहे हैं कि USB Cable का एक सिरा फोन में और दूसरा सिरा लैपटॉप में लगाने भर से फोन, लैपटॉप से कनेक्ट हो जाएगा तो आप गलत हैं। क्योंकि इससे तो आपका फोन लैपटॉप में Show ही नहीं होगा। इसके लिए आपको USB Debugging के Option को ऑन करना होगा। उसके बाद लैपटॉप आपके फोन को एक्सेस करने की परमिशन माँगेगा, जिसे आपको Allow करना होगा। Allow करने के बाद लैपटॉप आपके फोन की पहचान करेगा। तब कहीं जाकर आपका फोन लैपटॉप से कनेक्ट हो पाएगा।

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Enable USB Debugging

Running Services

यह फीचर आपको Running Services के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देता है। आपके फोन में कौन-कौनसी सर्विसेज चल रही हैंं? कौनसी सर्विस कब से चल रही है? कौन-कितनी RAM यूज कर रही है? सिस्टम सर्विसेज कितनी RAM यूज कर रहीं हैं? Apps कितनी RAM यूज कर रहीं हैं? फोन की कुल कितनी RAM यूज हो रही है और कितनी RAM खाली है? यह सारी जानकारी आपको इसी फीचर से मिलती है। इतना ही नहीं, अगर आप चाहेंं तो गैर-जरूरी सर्विसेज को बंद भी कर सकते हैं। इससे रैम और बैटरी बचेगी।

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Animation Scale

अगर आपका फोन एनिमेशन्स को ठीक-से प्रोसेस नहीं कर पा रहा है या फिर बहुत ही Solw चल रहा है तो आप Animation Scale को कम करके या फिर बंद करके अपने फोन की Performance और Speed को बढ़ा सकते हैं। इसके लिए आपको Windows Animation, Transition Animation और Animator Duration Scale को 1x से घटाकर .5x सेट करना है और फोन को Restart करना है, बस। आपका फोन पहले के मुकाबले काफी Fast हो जाएगा।

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Animation Scales

Force 4x MSAA

इस फीचर की मदद से आप अपने एंड्रॉयड फोन में उच्च गुणवता वाले ग्राफिक्स के साथ गेम्स का मजा ले सकते हैं। यह आपके फोन को OpenGL 2.0 गेम्स और ऐप्स में चार गुना Multi-Sample Anti-Aliasing का उपयोग करने के बाध्य करता है, जिसके कारण आपको Games और Apps में हाई-क्वालिटी ग्राफिक्स देखने को मिलते हैंं। लेकिन इसकी वजह से आपके फोन की बैटरी बहुत जल्दी खत्म हो जाती है। क्योकि हाई-क्वालिटी ग्राफिक्स की लोडिंग और प्रोसेसिंग में कई गुना ज्यादा बैटरी खर्च होती है।

Don’t Keep Activities

यह फीचर Background Processes को पूर्णतः बंद करने का काम करता है। जब आप अपने फोन में Game खेलते-खेलते अचानक Back बटन दबाकर बाहर निकल जाते हैं, तो वह पूर्णतः नहीं होता है, बल्कि बैकग्राउंड में चलता रहता है। और फोन की बैटरी चूसता रहता है। लेकिन अगर आपने Don’t Keep Activities फीचर को ON कर रखा है तो आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। क्योंकि यह फीचर आपके किसी भी App या Game से बाहर निकलते ही उसे पूर्णतः बंद कर देगा। जिससे कि वह App या Game बैकग्राउंड में Active नहीं रहेगा। इससे आपके फोन की बैटरी बचेगी।

Background Process Limit

यह फीचर बैकग्राउण्ड में चलने वाले Processes को सीमित करने का विकल्प देता है। यहाँ आपको छह विकल्प मिलते हैं – Standard Limit (असीमित), No Background Processes (शून्य), 1 प्रोसेस, 2 प्रोसेसेज, 3 प्रोसेसेज और 4 प्रोसेसेज। अगर आप स्टैण्डर्ड लिमिट चुनते हैं तो बैकग्राउण्ड में अनलिमिटेड प्रोसेसेज एक्टिव रहेंगे और बैटरी को जल्दी खत्म कर देंगे।

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लेकिन वहीं अगर आप No Background Processes को चुनते हैं तो बैकग्राउण्ड में एक भी प्रोसेस नहीं चल पाएगी, जिससे कि बैटरी की काफी बचत होगी और वह लम्बी चलेगी। इसी तरह आप 1, 2, 3 या 4 प्रोसेसेज में से कोई भी एक विकल्प चुन सकते हैं। बैकग्राउण्ड में जितने ज्यादा प्रोसेसेज चलेंगे, बैटरी उतनी ही जल्दी खत्म होगी।

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Background Processes Limit

Background Cheak

आपके फोन में बहुत सारी Apps ऐसी होती हैं, जो हमेशा एक्टिव रहती हैंं, भले ही आप उन्हें इस्तेमाल या न करें। ये ऐप्स बैकग्राउण्ड में हमेशा चलती रहती हैं। यह फीचर आपको इन्हीं ऐप्स के बारे में विस्तृत जानकारी देता है। यहाँ आपको उन तमाम ऐप्स की लिस्ट मिल जाती है जो बैकग्राउण्ड में चल रही हैं। साथ ही उन्हें Disable करने का ऑप्शन भी मिल जाता है। यानि कि आप गैरजरूरी ऐप्स को Disable करके रैम और बैटरी बचा सकते हैं। साथ ही अपने फोन की Performance को भी Improve कर सकते हैं।

उम्मीद करता हूँ, इस आर्टिकल के जरिए आपको Developer Options Kya Hai? इसका हमारे Phone में क्या उपयोग है? इसमें कौन-कौनसे Features होते हैं? और वे क्या काम आते हैं? इस विषय में काफी उपयोगी जानकारी मिली होगी। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया तो इसे Like और Share कीजिए और ऐसे ही और ज्ञानवर्धक आर्टिकल्स के लिए ‘टेकसेवी डॉट कॉम’ को Subscribe कर लीजिए। ताकि जब भी कोई नया आर्टिकल प्रकाशित हो तो आपको नोटिफिकेशन मिल जाए।

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