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Notch क्या है? आजकल हर किसी फोन में Notch क्यों दिया जाता है?

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जब से iPhone X लॉन्च हुआ है, Notch वाले फोन्स की बाढ़-सी आ गई है। सारी कंपनियाँ बिना सोचे-समझे Apple की नकल करने में लगी हुईं हैं। और चीनी स्मार्टफोन कंपनियाँ इस मामले में सबसे आगे हैं। Notch के बेसिक कॉन्सेप्ट को समझे बिना ही ये स्मार्टफोन कंपनियाँ एप्पल की नक़ल करने में लगी हुई हैं। लेकिन सवाल यह है कि नॉच आखिर है क्या? और इसकी जरूरत क्या है? क्या हर फोन में नॉच देना जरूरी है? क्या नॉच वाला फोन अच्छा होता है? आइए, विस्तार से जानते है। Everything About Notch

Notch की शुरुआत

दरअसल इस साल Apple Inc ने अपना नया स्मार्टफोन iPhone X लॉन्च किया था, जिसमें पहली बार नॉच देखने को मिला। हालाँकि Notch की शुरुआत तो Essential कम्पनी के PH-1 स्मार्टफोन से ही हो चुकी थी। पर इसे व्यावहारिक उपयोग में लाने का श्रेय एप्पल को ही जाता है। iPhone X के लॉन्च होने से पहले किसी भी स्मार्टफोन कम्पनी ने अपने फोन में Notch का प्रयोग नहीं किया। लेकिन जैसे ही iPhone X लॉन्च हुआ, सभी स्मार्टफोन कंपनियाँ एप्पल को कॉपी करने में लग गई।

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देखते ही देखते मार्केट में Notch Display वाले स्मार्टफोन्स की बाढ़ आ गई। किसी भी कंपनी ने ये सोचने की जहमत तक नहीं उठाई कि आखिर iPhone X में नॉच क्यों दिया गया है? और इसका मकसद क्या है? बस, सबको एप्पल बनना था, सो दनादन Notch वाले Phones बनाते गए। और देखते ही देखते यह एक ट्रेंड बन गया, जिसे आज सारी मोबाइल कंपनियाँ फॉलो कर रही है। हालांकि शुरुआत में Samsung इस भेड़चाल का हिस्सा नहीं बनी। लेकिन बाद में बनना पड़ा। क्योंकि सैमसंग की सेल तेजी से कम हो रही थी, जबकि चाईनीज कंपनियों की सेल पूरी रफ्तार से आगे बढ रही थी। सिर्फ नॉच की वजह से।

Notch बना मजाक

नकल करने बनने के चक्कर में मोबाइल कंपनियाँ एप्पल तो नहीं बन सकी। पर हाँ, मजाक का पात्र जरूर बन गई। नॉच डिस्प्ले के साथ आने वाले Oppo और Vivo के शुरुआती फोन्स में टाइम/डेट जैसी चीज़ें ही फिट नहीं थी! स्क्रीन से बाहर जा रही थी। क्योंकि इन्होंने अपने Software और UI (User Interface) को नॉच के हिसाब से ऑप्टिमाइज़ ही नहीं किया। बल्कि वही पुराना UI चिपका दिया, जिससे बहुत सी चीजें स्क्रीन से बाहर चली गई यानि कि कट गई। मतलब इन कंपनियों ने आँख मूंदकर कॉपी किया था Apple को।

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इन सारी कंपनियों ने यह समझने की कोशिश ही नहीं की कि एप्पल ने iPhone X में नॉच क्यों दिया? आखिर इसकी जरुरत क्या थी? और एप्पल ने इसके लिए क्या-क्या किया? यह समझने की बजाय इन कंपनियों ने Notch को एक नया फैशन समझ लिया। और आनन-फानन में iPhone X की सस्ती कॉपियाँ बना-बनाकर पूरा बाजार भर दिया। अब इसके लिए न तो इन कंपनियों ने कोई Research की और न अपने सॉफ्टवेयर और यूआई को ऑप्टिमाइज किया। नतीजा, एप्पल बनने की जगह मजाक का पात्र बन गई। यानि कि ‘बनने चले थे चौबजी-छबेजी, पर दुबेजी बनकर रह गए।’

iPhone X में Notch क्यों दिया?

ऐप्पल के पहले आइफोन (iPhone 1) से लेकर iPhone 8 तक हर आइफोन का सामने का डिजायन Same है। हालांकि शुरुआत में हर नये आइफोन iPhone में कुछ नया इनोवेशन देखने को मिला। लेकिन बाद में सिर्फ फोन का साईज और कैमरों की संख्या बढ़ी। इनोवेशन के नाम पर कुछ भी नया देखने को नहीं मिला। यहाँ तक कि iPhone 6 से लेकर iPhone 8 तक तो सिर्फ फोन का मॉडल नम्बर ही बदला है। बाकी प्रोसेसर के अलावा कुछ भी नया देखने को नहीं मिला। यह मैं नहीं कह रहा बल्कि आइफोन यूजर्स ने कहना शुरू कर दिया था। इसीलिए Apple ने कुछ नया करने की ठानी।

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उस समय सभी Phones का डिजायन लगभग एक जैसा ही होता था। यानि कि फ्रंट में डिस्प्ले के उपर और नीचे एक-एक इंच के बैजल्स होते थे और बैक पैनल पर कंपनी का लोगो, कैमरा और फिंगरप्रिंट सेंसर। हर स्मार्टफोन कंपनी इसी डिजायन को फॉलो करती थी। इसीलिए Apple ने सोचा कि कई सालों से फोन के फ्रंट डिजायन में कोई खास बदलाव नहीं आया है। इसलिए डिजायन को लेकर कुछ करना चाहिए। यही सोचकर Apple ने कई महीने Research करके एक नया डिजायन तैयार किया। जिसमें स्क्रीन का दायरा बढ़ाने के लिए Notch का विकल्प रखा।

Notch का Idea

इसलिए Apple ने कुछ नया करने और स्क्रीन का साईज बढाने के लिए मजबूरी में Notch का सहारा लिया। क्योंकि कैमरा और स्पीकर स्क्रीन पर नहीं दिए जा सकते थे। इसीलिए इनके मॉड्यूल्स को फिट करने के लिए फोन की बॉडी का एक छोटा-सा हिस्सा यूज करना पड़ा। और इसके लिए कंपनी को स्क्रीन के उपरी हिस्से को काटना पड़ा। अब इस छोटी-सी जगह में कंपनी ने Camera और Speaker तो फिट किए ही, साथ में दुनिया भर के Sensors भी दिए। मतलब नॉच के लिए स्क्रीन का जितना टुकड़ा काटा गया, उसका पूरी तरह इस्तेमाल भी किया गया।

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इस नॉच के पीछे कंपनी की कई महीनों की मेहनत लगी। iPhone X का डिजायन फाईनल होने के बाद कंपनी को अपने सॉफ्टवेयर और यूजर इंटरफेस को Notch के हिसाब से रि-डिजायन करना पड़ा, जिसमें कई महीनों की मेहनत लगी। तब जाकर iPhone X अस्तित्व में आया। ऐप्पल ने नॉच सिर्फ इसलिए दिया ताकि iPhone X बाकी iPhones से अलग लगे। और डिस्प्ले का आकार बढ़ाया जा सके, जिससे यूजर्स को सामने की तरफ सिर्फ स्क्रीन ही देखने को मिले। और इस मकसद में कंपनी काफी हद तक सफल भी हुई। क्योंकि iPhone X में सामने की तरफ सिर्फ स्क्रीन ही थी, बैजल्स काफी कम थे।

अक्ल नहीं, सिर्फ नकल

नकलची कंपनियों ने बिना सोचे-समझे दनादन iPhone X के डिजायन को कॉपी करना शुरू कर दिया। और इस भेड़चाल में सबसे पहला नम्बर आता है Oppo और Vivo का। इन दोनों कंपनियों ने अपने फोन्स में नॉच डिस्प्ले तो दिया, मगर एप्पल की तरह बैजल्स नहीं हटा पाए। इनके Phones में नीचे की तरफ लगभग आधा इंच तक बैजल्स देखने को मिले। साथ ही इतने बड़े नॉच में इन्होंने सिर्फ कैमरा और स्पीकर ही फिट किए। क्योंकि Apple जितने Sensors देने की औकात तो इनकी थी नहीं। इतने Sensors तो ये पूरे फोन में भी नहीं देते, तो नॉच में कहाँ से देते?

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खैर, लोगों ने भी “iPhone तो नहीं ले सकते। पर iPhone की तरह दिखने वाला फोन तो ले ही सकते हैं।” की तर्ज पर इन Phones को खरीदना शुरू कर दिया। और देखते ही देखते यह एक नया ट्रेंड बन गया। और इसलिए बाकी कंपनियों को भी इस ट्रेंड को मजबूरन अपनाना पड़ा। Samsung इसका सबसे अच्छा उदहारण है। शुरुआत में सैमसंग Notch के सख्त खिलाफ थी। यहाँ तक कि कंपनी ने अपने फोन्स के बैजल्स को काफी हद तक कम कर दिया। लेकिन फिर भी बात नहीं बनी। तब जाकर Samsung को मजबूरन इस भेड़चाल का हिस्सा बनना पड़ा।

यह Notch नहीं है भाई!

आजकल जो कंपनियाँ अपने मोटे-मोटे बैजल्स वाले Phones में धड़ल्ले से नॉच दे रही हैं, इसे Notch नहीं कहते। असल में इसे बेवकूफी कहते हैं। क्योंकि नॉच का मकसद ही स्क्रीन साईज को बढाना है। अगर डिस्प्ले में नॉच दिया गया है तो इसका मतलब है कि फोन में सामने की तरफ बिल्कुल भी जगह नहीं है। इतनी भी नहीं कि 3 मिमी. का कैमरा लगाया जा सके। अगर बैजल्स में कैमरा लगाने जितनी जगह मौजूद है, तो फिर नॉच देने का मतलब क्या है? कैमरा ही तो लगाना है, वह बैजल्स में लगा दीजिए। इसके लिए डिस्प्ले को काटने की क्या जरूरत है?

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मैंने Oppo-Vivo के Phones में उपर और खासकर नीचे की तरफ 15-15 मिमी. के बैजल्स देखे हैं। इतने मोटे बैजल्स में तीनों फिजिकल बटन्स आराम से आ सकते हैं। लेकिन यह जगह खाली पड़ी है, कोई काम नहीं आ रही। अगर सच कहूँ तो फोन की लम्बाई बढ़ाने के अलावा इसका और कोई उपयोग नहीं है। उपर से Phone भद्दा दिखता है, सो अलग। ऐसे में Notch देने का क्या तुक है? मेरी तो कुछ समझ में आया नहीं। ये कंपनियाँ सिर्फ और सिर्फ अपने Phones को मॉडर्न दिखाने के लिए जबरन इस ट्रेंड को फॉलो कर रही हैं।

नॉच वाला फोन अच्छा?

खैर, अब तक आप अच्छी तरह समझ चुके होंगे कि सही मायने में Notch क्या है और इसकी जरुरत क्यों पड़ी? अब सवाल यह है कि क्या नॉच वाला फोन अच्छा होता है?

तो इसका जवाब है – बिल्कुल भी नहीं। मेरी राय में नॉच वाला फोन वैसा ही है, जैसा बिना नॉच वाला। बल्कि बिना नॉच वाला फोन उल्टा ज्यादा अच्छा दिखता है, बजाय नॉच वाले फोन के। क्योंकि बिना नॉच वाले फोन में आपको स्क्रीन पर हर डिटेल पूरी दिखाई देती है। जबकि नॉच वाले फोन में कटी हुई दिखाई देगी। अभी भी बहुत सी ऐसी ऐप्स हैं जो नॉच को सपोर्ट नहीं करती और इसका सबसे अच्छा उदाहरण है Subway Surfers (एक गेम) जिसे अगर आप नॉच वाले फोन में खेलोगे, तो उपर की पट्टी में जो भी लिखा होगा, आपको दिखाई नहीं देगा, क्योंकि नॉच की वजह से कट जाएगा।

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यह तो सिर्फ एक उदाहरण है। ऐसी न जाने कितनी Apps हैं, जिनमें आपको पूरी डिटेल दिखाई नहीं देती। कुछ Recharge वाली Apps में तो आप अपना Balance तक नहीं देख सकते, क्योंकि वह नॉच की वजह से कट जाता है। और यह सब मैं ऐसे ही नहीं कह रहा बल्कि मैंने हरेक चीज को पर्सनली एक्सपीरियंस किया है। मैं इस वक्त VivoY83 फोन यूज कर रहा हूँ, जिसमें नॉच का बड़े ही अच्छे से कबाड़ा किया गया है। बहुत सारी ऐप्स ऐसी हैं, जिनको यह फोन ठीक से सपोर्ट ही नहीं करता। इसलिए इन ऐप्स में कभी भी पूरी डिटेल दिखाई नहीं देती। बल्कि कुछ-न-कुछ हिस्सा कट ही जाता है।

नॉच वाला फोन खरीदें या नहीं?

अगर आपको Notch वाले फोन से पागलपन की हद तक प्यार है तो आप iPhone X ले लीजिए। और अगर आपका इतना बजट नहीं है तो कुछ दिन रूक जाइए। Notch वाले फोन्स को थोडा इम्प्रूव होने दीजिए। अभी इन फोन्स में काफी सुधार की जरुरत है। साथ ही Apps को भी ऑप्टिमाइज़ेशन की सख्त जरूरत है। उम्मीद है, आने वाले समय में हमें बेहतर Smartphones देखने को मिलेंगे, जो नोच को पूरी तरह सपोर्ट करेंगे। साथ ही तब तक कीमत भी कम हो जाएगी। इसीलिए मैं तो यही सलाह दूँगा कि अभी मत खरीदिए। चार-छह महीने इंतजार कीजिए।

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