क्या रातभर चार्जिंग में लगाए रखने से फोन में विस्फोट हो सकता है? मिथ vs सच

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बीते एक-डेढ दशक में मोबाईल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में जबरदस्त विकास हुआ है। लेकिन फिर भी स्मार्टफोन को लेकर कुछ ऐसी भ्रांतियां (Misconceptions) हैं, जो बेसिक फोन के जमाने से चली आ रही हैं। ऐसी ही कुछ भ्रांतियां हैं फोन की Battery और Charging को लेकर, जिन्हें लोग आज भी सच मानते हैं। जैसे कि रातभर Charging में लगाए रखने से फोन में विस्फोट हो जाता है। और बैटरी को हमेशा 100% चार्ज करना चाहिए आदि। इसीलिए आज के इस आर्टिकल में हम Battery और Charging से जुडी भ्रांतियों और उनकेे पीछे छिपी सच्चाई (Truth) के बारे में जानेंगे। तो आइए, जानते हैं इनके बारे में एक-एक करके।

1. Overnight Charging से Phone Blast हो जाता है

बहुत-से स्मार्टफोन यूजर्स का यह मानना है कि अगर उन्होंने रातभर फोन को Charging में लगाकर छोड़ दिया तो Overcharging की वजह से फोन में विस्फोट हो जाएगा। या फिर Overnight Charging की वजह से बैटरी खराब हो जाएगी। लेकिन मैं आपको बताना चाहूँगा कि यह सिर्फ एक Misconception है। अगर आप चाहें तो कई महीनों तक अपने फोन को Charging में लगाकर छोड़ सकते हैं, कुछ नहीं होगा। क्योंकि आजकल के Smartphones उच्च सुरक्षा मानकोंं को ध्यान मेंं रखकर बनाए जाते हैंं। खासकर Lithium-ion Battery वाले Devices में तो Safety का अतिरिक्त ध्यान रखा जाता है। क्योंकि लीथियम ऑयन बैटरी Overcharging को लेकर काफी Sensitive (संवेदनशील) होती है।

कोई भी कंपनी यह नहीं चाहती कि उसके फोन में विस्फोट हो और मार्केट में उसका नाम खराब हो। इसलिए हर कंपनी अपने Phone और Battery दोनों में Temperature Sensor (तापमान सेंसर) और Overcharging Protection Circuit लगाती है। ऑवरचार्जिंग प्रोटेक्शन सर्किट फोन को ऑवरचार्ज होने से रोकता है। जैसे ही बैटरी 100% चार्ज हो जाती है, यह पॉवर सप्लाई को बंद कर देता है। लेकिन जैसे ही बैटरी 100% से कम होती है, पॉवर सप्लाई फिर से शुरू हो जाती है और बैटरी 100% पर आकर रूक जाती है। यह क्रम तब तक चलता रहता है, जब तक कि आप अपने फोन को Charging से हटा नहीं लेते। यानि कि आपका फोन अगर महीनों तक भी Charging में लगा रहेगा तब भी वह न तो कभी ऑवरचार्ज होगा और न ही उसमें कोई विस्फोट होगा।

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जैसा कि आप सब जानते हैं कि Charging के दौरान फोन में Heat (उष्मा) पैदा होती है, जिससे फोन गर्म हो जाता है। इसलिए फोन में Temperature Sensor दिया जाता है, जो फोन और बैटरी के तापमान पर नजर रखता है। स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों के मुताबिक Charging के दौरान फोन का तापमान 40℃ तक पहुँँचना आम बात है। लेकिन अगर तापमान इससे उपर चला जाता है तो तापमान सेंसर फोन के सॉफ्टवेयर को इसकी सूूूचना दे देता है। परिणामस्वरूप Charging को धीमा (Slow) कर दिया जाता है। गर्मियों के मौसम में आपने देखा होगा कि Fast Charging के बावजूद फोन काफी धीरे चार्ज होता है। यानि कि फोन जितना ज्यादा गर्म होता है, वह उतना ही धीरे चार्ज होता है। अगर आपने कमरे में कूलर या AC लगा रखा है और कमरा ठण्डा रहता है तो बात अलग हैं।

2. बैटरी को 0% से 100% चार्ज करना चाहिए।

बहुत-से स्मार्टफोन यूजर्स का यह मानना है कि Battery को हमेशा फुल (100%) चार्ज करना चाहिए और जब तक बैटरी पूरी तरह Discharge यानि कि 0% न हो जाए, तब तक उसे Charge नहीं करना चाहिए। इसके पीछे तर्क यह दिया जाता है कि इससे बैटरी की Cycle Life बढ़ती है और वह लम्बी चलती है। लेकिन यह बात सच नहीं है। अगर स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों की मानें तो फोन की Battery को पूरी तरह Discharge नहीं करना चाहिए। जब बैटरी का चार्जिंग लेवल 20% पर आ जाए तो उसे फिर से Charge कर लेना चाहिए। और 80% से ज्यादा चार्ज नहीं करना चाहिए। यानि कि बैटरी को हमेशा 20% से 80% के बीच चार्ज रखना चाहिए, इससे न सिर्फ Battery की Health अच्छी रहती है बल्कि उसका जीवनकाल भी बढ़ जाता है।

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दूसरी सबसे बड़ी भ्रांति है Battery की Cycle Life को लेकर। दरअसल Battery की एक निश्चित Cycle Life होती है जो तकरीबन 500 से 600 के बीच होती है। एक Cycle का मतलब होता है बैटरी को एक बार फुल डिस्चार्ज से फुल चार्ज करना। यानि 0% से 100% तक चार्ज करने पर Battery का एक Cycle पूरा हो जाता है। इस हिसाब से आप बैटरी को 500 से 600 बार तक चार्ज कर सकते हैं। उसके बाद Battery की Capacity (क्षमता) कम हो जाएगी और वह जल्दी-जल्दी Discharge होना शुरू जाएगी। तब आपको बैटरी बदलवानी पड़ेगी।
लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि Cycle Life पूरी होते ही बैटरी एकदम से दम तोड़ देगी। बैटरी उसके बाद भी काम करेगी लेकिन उसकी कार्यक्षमता में कमी आ जाएगी और वह 6 घंटे की जगह 5 घंटे, 4 घंटे या फिर 3 घंटे ही चल पाएगी। यानि कि Battery Backup लगातार कम होता जाएगा।

अब भ्रांति यह है कि भले ही आप बैटरी को 60% चार्ज करें या फिर 100%, दोनों ही स्थितियों में एक पूरा Cycle माना जाएगा। यानि कि अगर आप बैटरी को एक बार में 100% चार्ज करेंगे तो सिर्फ एक Cycle कम होगा। लेकिन वहीं अगर आप एक बार में सिर्फ 60% चार्ज करेंगे तो दो Cycle कम होंगे। क्यों? क्योंकि बची हुई 40% बैटरी को जब आप Charge करेंगे तो उसका एक पूरा Cycle माना जाएगा। इस तरह 60% और 40% के दो Cycle कम हो जाऐंगे। और अगर इसी तरह चलता रहा तो Battery की Cycle Life जल्दी खत्म हो जाएगी।

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लेकिन मैं आपको बताना चाहूँगा कि यह बात सही नहीं है। दरअसल 0% से 100% का एक Cycle माना जाता है, यह बात बिल्कुल सही है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि 60% चार्ज करने पर आपको एक Cycle का नुकसान हो जाएगा। क्योंकि Cycle अभी पूरा नहीं हुआ है। जब आप 40% और चार्ज करेंगे तब जाकर एक Cycle पूरा होगा। अगर आपको मेरी बात पर यकीन नहीं है तो आप दिग्गज टेक कंपनी Apple का Charge Cycle पर दिया गया यह Statement पढ़ सकते हैं…

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Apple On Charging Cycle (Wikipedia)

3. दूसरी कंपनी के चार्जर से बैटरी खराब हो जाती है।

बहुत-से स्मार्टफोन यूजर्स यह सलाह देते हुए मिल जाते हैंं कि अगर आप Phone के साथ आए हुए Original Charger की जगह किसी अन्य कंपनी का Charger इस्तेमाल करेंगे तो आपके फोन की Battery खराब हो जाएगी। इसलिए हमेशा फोन के साथ आए हुए ऑरिजनल चार्जर का ही इस्तेमाल करना चाहिए। यहाँ तक कि फोन बनाने वाली कंपनियाँ भी यही कहती हैं। लेकिन यह सिर्फ आधा सच है। पूरा सच यह है कि आप किसी भी कंपनी का Charger इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन शर्त यह है कि वह Original होना चाहिए और आपके फोन के अनुकूल होना चाहिए।

अगर आप कोई सस्ता-सा घटिया Quality का Charger इस्तेमाल करेंगे, जो आपके फोन के अनुकूल ही नहीं है तब तो Battery खराब होनी ही है। इससे तो आपका फोन गर्म होकर फट भी सकता है। जी हाँ, A local charger can cause your phone to burst. लेकिन असली चार्जर से ऐसा कभी नहीं होगा। Phone Blast होने के जितने भी मामले सामने आते हैं, उनमें से ज्यादातर मामलों में कंपनी की कोई गलती नहीं होती। बल्कि सारी गलती Users की ही होती है। इसके पीछे का एक कारण गलत Charger या गलत Cable का इस्तेमाल करना भी होता है।

कोई भी कंपनी यह नहीं चाहती कि उसका Phone Blast हो। क्योंकि जब भी किसी कंपनी का फोन ब्लास्ट होता है तो मार्केट में उसकी साख पर बहुत बुरा असर पड़ता है। उसे ग्राहकों के अविश्वास का सामना तो करना पड़ता ही है, साथ ही प्रतिस्पर्धी कंपनियाँ भी इस बात का पूरा फायदा उठाती हैं। इसलिए हर कंपनी ऐसी स्थिति से बचना चाहती है। इसीलिए Smartphone कंपनियाँ इस बात पर जोर देती हैं कि आप उनके Original Charger का ही इस्तेमाल करें। यहाँ तक कि User Manual में भी इस बात को चेतावनी के तौर पर लिखा जाता है।

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लेकिन अगर आप एक Original Charger इस्तेमाल कर रहे हैं, जो आपके फोन के अनुकूल है तो फिर वह किसी भी कंपनी का हो, कोई फर्क नहीं पड़ता। मैंं खुद अपने सभी फोन्स (Galaxy A50, Galaxy C9 Pro, Nokia 7.1, Redmi Note 7 Pro आदि) के लिए एक ही चार्जर का इस्तेमाल करता हूँ जो कि Samsung का एक Fast Charger है। मेरे कहने का मतलब यह है कि अगर आपके पास किसी विश्वसनीय कंपनी का Original Charger है तो उससे आप बेझिझक अपना फोन चार्ज कर सकते हैं, भले ही वह किसी भी कंपनी का क्यों न हो। लेकिन Local Charger का इस्तेमाल कभी मत कीजिए। क्योंकि ये सेफ्टी मानकों के अनुरूप नहीं होते। साथ ही इनका Input और Output वॉल्टेज भी कम-ज्यादा हो सकता है, जो फोन की Battery के साथ मैच नहीं करता।

इसीलिए हमेशा Original Charger इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा कुछ Smartphone Users आज भी इस बात पर यकीन करते हैं कि Battery Saver Apps सच में फोन की बैटरी बचाते हैं। लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। असल में ये Battery Saver ऐप्स Battery बचाने की बजाय बैटरी चूसने का काम करते हैं। इसलिए इन्हें दुनिया की 10 सबसे फालतू और Useless Apps की कैटेगरी में रखा गया है। हालांकि इसके उपर मैं पहले ही एक आर्टिकल लिख चुका हूँ इसलिए फिर से उन्हीं बातों को दोहराने का कोई फायदा नहीं है। आप उपर दी गई लिंक पर विजिट करके पूरा आर्टिकल इत्मीनान से पढ़ सकते हैं।

उम्मीद करता हूँ इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद Charging से जुड़ी भ्रांतियों और उनके पीछे सच को जानने में आपको काफी मदद मिली होगी। अगर यह आर्टिकल आपको पसंद आया तो इसे Like और Share कीजिए। और ऐसे ही और ज्ञानवर्धक आर्टिकल्स के लिए टेकसेवी डॉट कॉम को ईमेल द्वारा Subscribe कर लीजिए ताकि हर नये आर्टिकल के प्रकाशित होते ही आपको उसका Notification मिल जाए।

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मैं मेघराज मुंशी, एक वेब डिजायनर, ग्राफिक आर्टिस्ट और ब्लॉगर हूँ। वैसे पेशे से मैं एक शिक्षक हूँ और शिक्षा विभाग राजस्थान में कार्यरत हूँ। पढ़ने-पढ़ाने और लिखने के अलावा मुझे फिल्में देखना बहुत पसंद है। साहित्य, संगीत, सिनेमा, अंतरिक्ष, विज्ञान और तकनीकी मेरे पसंदीदा विषय हैं।

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