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Copyright क्या होता है? कॉपीराइट अधिकारों का उल्लंघन एवं सजा

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अगर आप एक Content Creator हैं तो आपको कॉपीराइट के बारे में जरूर पता होना चाहिए। क्योंकि यह Content के स्वामित्व से जुड़ा कानून है। जिसका उल्लंघन करने पर सजा (जेल और जुर्माना दोनों) का प्रावधान है। इसीलिए बतौर एक Content Creator आपको पता होना चाहिए कि Copyright क्या हैै? इसके Rules & Regulations क्या हैं? इसके तहत कौन-कौनसी सामग्री आती है? Fair Use Policy क्या है? और Copyright का उल्लंघन करने पर कौन-कौनसी सजा का प्रावधान है?

Copyright (प्रतिलिप्याधिकार)

दरअसल Content की चोरी करना कोई नई बात नहीं है। यह काम पहले भी होता था और आज भी होता है। लेकिन आज इसको लेकर कड़े कानून हैं। हालांकि इतिहास में ऐसी कई घटनाओं का जिक्र मिलता है। जब कलाकारों से सर्वश्रेष्ठ काम करवाने के बाद उनके हाथ काट दिए गए। ताकि वे दुबारा वैसा काम न कर सकें। यानि कि कलाकारों को उनके ही काम की प्रतिलिपि बनाने तक का अधिकार नहीं था।

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जरा सोचिए! अगर आप दिन-रात मेहनत करके कोई किताब लिखें। और कोई दूसरा उसे Copy करके सस्ती रेट में बेचे और आपसे ज्यादा पैसे कमाऐ, तो आपको कैसा लगेगा? जाहिर-सी बात है बुरा लगेगा। आप उस इंसान को जल्द से जल्द रोकना चाहेंगे। और शायद सजा भी दिलवाना चाहें। लेकिन यह Copyright Act के बिना संभव नहीं है। इसीलिए कॉपीराइट एक्ट लाया गया। ताकि बौद्धिक संपदा के अनाधिकृत इस्तेमाल और दुरूपयोग को रोका जा सके।

Copyright क्या है?

कॉपीराइट असल में बौद्धिक संपदा से जुड़ा एक कानूनी अधिकार (Legal Right) है। जो व्यक्ति को उसके मौलिक कार्य की प्रतिलिपि बनाने, संशोधन करने और बेचने का अधिकार देता है। अर्थात् मालिकाना हक प्रदान करता है। इसका सीधा-सा मतलब यह है कि कोई व्यक्ति अपनी बनाई हुई किसी वस्तु या सामग्री (जैसे कि लेख, ध्वनि, फिल्म, पेंटिंग, मूर्ति आदि) को Publish कर सकता है, Reproduce कर सकता है और बेच सकता है।

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उदाहरण के लिए, अगर आप कोई किताब लिखें तो उस पर आपका Copyright होगा। यानि कि आप उसे Re-Publish कर सकते हैं, संशोधित कर सकते हैं और बेच भी सकते हैं। लेकिन अगर कोई दूसरा व्यक्ति ऐसा करेगा, तो उसे आपसे Permission लेनी होगी। क्योंकि आप उस किताब के असली मालिक (Copyright Holder) हैं। इसीलिए आपसे अनुमति लिए बिना कोई भी आपकी किताब को Publish या Copy नहीं कर सकता। क्योंकि यह Copyright Law का उल्लंघन है।

Copyright Symbol

कॉपीराइट को दर्शाने के लिए एक खास प्रतीक चिन्ह है, जिसे Copyright Symbol या Copyright Sign कहा जाता है। इसका इस्तेमाल विभिन्न कार्यों के लिए Copyright Notices में किया जाता है। हालांकि हर जगह इसकी जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन कॉपीराइट संबंधी उद्घोषणाओं और नोटिसों में इसका प्रमुखता से इस्तेमाल किया जाता है। वैसे Universal Copyright Convention में इसके उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। Copyright Symbol कुछ ऐसा दिखता है :-

Copyright-Symbol
Copyright Symbol

असल में Copyright Symbol एक Circled Capital Letter ‘C’ है। यानि कि गोल घेरे में बंद अंग्रेजी का कैपिटल ‘सी’ है। जो कि हर वेबसाइट की नीचे आसानी से देखने को मिल जाता है। इसे Copyright Logo भी कहा जाता है। यह एक सर्वमान्य प्रतीक चिन्ह है। जिसका व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है।

Copyright Act 1957

1957 में स्वतंत्र भारत का पहला कॉपीराइट एक्ट बना। जिसे Copyright Act 1957 (प्रतिलिप्याधिकार अधिनियम 1957) के नाम से जाना जाता है। हालांकि इससे पहले भी भारत में कॉपीराइट एक्ट था। लेकिन यह ब्रिटेन के Imperial Copyright Act 1911 पर आधारित था। इसीलिए 1957 में इस एक्ट को निरस्त कर दिया गया। और नया Copyright Act लागू किया गया, जिसे प्रतिलिप्याधिकार अधिनियम 1957 के नाम से जाना जाता है

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इस एक्ट में अब तक कई Amendments (संशोधन) हो चुके हैं। जैसे कि हाल ही में 2019 में एक Amendment हुआ था। जिसमें Appellate Board की स्थापना, Copyright Societies की Tariff Schemes और Royalty से जुड़े कई प्रस्ताव थे। इसी तरह पहले भी कई संशोधन हो चुके हैं।

दरअसल समय-समय पर Content की प्रकृति और प्रारूप बदलता रहता है। जैसे कि 1957 में जब Copyright Act लागू हुआ था। तब Internet नहीं था। इसीलिए Digital Content का कोई Scope नहीं था। लेकिन बाद में जब इंटरनेट का आविष्कार हुआ, तो Digital Content की बाढ़ आ गई। इसीलिए Copyright Act में संशोधन कर डिजिटल कॉन्टेंट से जुड़े कई नियम जोड़े गए।

कॉपीराइट के तहत सामग्री

अगर आप सोच रहे हैं कि Copyright Act के तहत सिर्फ लेख, फोटो, वीडियो और म्यूजिक ही आता है! तो आप गलत सोच रहे हैं। क्योंकि इस एक्ट के तहत संरक्षण पाने वाली सामग्री की लिस्ट बहुत लम्बी है। असल में इस एक्ट के तहत निम्नलिखित सामग्री (Content) को Protect किया जाता है :-

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  • साहित्यिक रचना – गीत, कहानी, कविता, नाटक, उपन्यास, एकांकी, लघुकथा, पटकथा, लेख, निबन्ध आदि।
  • चलचित्र – वीडियो, फिल्म, डॉक्यूमेंट्री, एनीमेशन आदि।
  • ध्वन्यंकन – आवाज, रिकॉर्डिंग, साउंड इफेक्ट्स, वाद्ययंत्र से उत्पन्न ध्वनि, संगीत आदि।
  • चित्र – फोटोग्राफ, रंगचित्र, रेखाचित्र, आरेख, मानचित्र, चार्ट, पेंटिंग, कार्टून आदि।
  • कलात्मक डिजायन – किसी भवन, सरंचना आदि का डिजायन अथवा नक्शा।
  • उत्कीर्णन – दीवार, शिलाखंड, धातुपत्र, काष्ठ, पत्थर आदि पर उकेरी गई आकृतियाँ।
  • मूर्तिकला – धातु, पत्थर, लकड़ी, रबर, प्लास्टिक आदि की कलात्मक मूर्तियाँ।
  • डिजिटल सामग्री – इलेक्ट्रॉनिक मेल, लेख, कोड, वेबसाइट, Ebooks, ग्राफिक्स, वीडियो गेम्स, मोबाइल एप्लीकेशन, सॉफ्टवेयर, कम्प्यूटर प्रोग्राम, सारणियाँ, आँकड़े आदि।
  • व्याख्यान – अभिभाषण, भाषण, प्रवचन आदि।
  • प्रस्तुतीकरण – गायन, अभिनय, नृत्य, जादू, करतब, तमाशा, कलाबाजी, मदारी का खेल, नाटक आदि।
  • प्लेट – ब्लॉक, सांंचा, मैट्रिक, अंतरक, नेगेटिव या कोई ऐसी युक्ति, जिसकी मदद से किसी कृति को Print या Reproduce किया जा सके।

उपरवर्णित सामग्री (Content) के लिए इस एक्ट में ‘कृति‘ शब्द का इस्तेमाल किया गया है।

Copyright Holder & Legal Rights

जब कोई व्यक्ति किसी मौलिक कृति की रचना करता है, तो वह उसका Copyright Holder कहलाता है। यानि कि उस कृति पर उस व्यक्ति का मालिकाना हक होता है। अगर अधिकारों की बात करें! तो Copyright Act 1957 के तहत कॉपीराइट धारक को निम्न अधिकार (Legal Rights) प्राप्त हैं :- 

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  • कृति को आंशिक अथवा पूर्ण रूप से पुनरूत्पादित (Reproduce) करना।
  • प्रतिलिपि (Copies) बनाना।
  • सार्वजनिक रूप से प्रकाशित (Publish) करना।
  • फिल्मांकन करना (कृति से संबंधित कोई फिल्म या वीडियो बनाना)
  • ध्वन्यंकन करना (गाना या संगीतबद्ध करना)
  • किसी दूसरी भाषा में अनुवाद (Translation) करना।
  • डिजिटल रूप में संग्रह (Store) करना।
  • किसी को उपयोग हेतु अनुमति देना।
  • कॉपीराइट का हस्तांतरण (Transfer) करना
  • किसी को किराये पर देना।
  • बेचना।

Copyright की अवधि

जब कोई रचनाकार किसी कृति का निर्माण कर उसे सार्वजनिक रूप से प्रकाशित/संसूचित करता है! तो उसी वक्त उस कृति पर रचनाकार का अधिकार (कॉपीराइट) हो जाता है। और यह अधिकार उसकी मृत्यु के 60 वर्ष बाद तक बना रहता है। यानि कि Copyright Holder की मृत्यु के बाद 60 वर्ष तक उस कृति पर उसके उत्तराधिकारी का कॉपीराइट रहता है।

Copyright Infringement

अब सवाल यह है कि कॉपीराइट का उल्लंघन कैसे होता है? यानि कि क्या करने पर उल्लंघन होता है और क्या करने पर उल्लंघन नहीं होता? तो इसके लिए Copyright Act 1957 में जो व्यवस्था की गई है। उसके मुताबिक निम्नलिखित कृत्य Copyright Infringement की श्रेणी में आते हैं।

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कोई ऐसी कृति, जिस पर आपका मालिकाना हक (कॉपीराइट) नहीं है, का उपयोग करना Copyright Infringement की श्रेणी में आता है। यहाँ ‘उपयोग करने’ का अर्थ है :-

  • प्रतिलिपि बनाना (आंशिक अथवा पूर्ण रूप से कॉपी/नकल/चोरी करना)
  • पुनरूत्पादन करना (बदलाव करके या तोड़-मरोड़कर फिर से बनाना)
  • प्रकाशित करना (सार्वजनिक रूप से Publish करना)
  • भाषान्तरण करना (किसी अन्य भाषा में अनुवाद करना)
  • किसी अन्य माध्यम में बदलना (फिल्मांकन, ध्वन्यंकन या डिजिटल माध्यम में बदलना)
  • व्यक्तिगत लाभ अथवा व्यावसायिक उपयोग के लिए प्रतियाँ (Copies) तैयार करना।
  • किराये पर उपलब्ध करवाना।
  • बेचना।

Fair Use Policy

आपने Fair Use Policy के बारे में जरूर सुना होगा। यह दरअसल Copyright Protected Content को कुछ शर्तों के अधीन इस्तेमाल करने की इजाजत देती है। और ऐसा करने से कॉपीराइट का उल्लंघन नहीं होता। लेकिन सवाल यह है कि ये शर्तें कौन-कौनसी हैं? आइए, जानते हैं।

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  • किसी कृति का प्राइवेट या निजी उपयोग, जिसमें अध्ययन और अनुसंधान भी शामिल है। (यह नियम Computer Programs पर लागू नहीं होता)
  • किसी कृति की समालोचना या समीक्षा।
  • समसामयिक घटनाओं और क्रियाकलापों की रिपोर्ट तैयार करना, जिसमें सार्वजनिक रूप से दिए गए व्याख्यान भी शामिल है।
  • किसी ऐसे कम्प्यूटर प्रोग्राम की प्रतियाँ बनाना, जिसके लिए लाईसेंस अथवा अनुमति प्राप्त हो।
  • सार्वजनिक रूप से (Public Domain में) उपलब्ध सामग्री का अस्थायी रूप से भंडारण (Storage) करना।
  • गैर-वाणिज्यिक व्यक्तिगत उपयोग के लिए वैध रूप से (Legal तरीके से) से खरीदी गई प्रति से कम्प्यूटर प्रोग्राम की प्रतियाँ तैयार करना।
  • न्यायिक कार्यवाही की रिपोर्ट हेतु किसी कृति का पुनरूत्पादन।
  • विधानमंडल के किसी भी सदन के सचिवालय द्वारा जारी किसी कृति का उस सदन के सदस्यों के उपयोग के लिए पुनरूत्पादन।
  • विधि (कानून) द्वारा जारी किसी प्रामाणित प्रति में किसी कृति का पुनरूत्पादन।
  • किसी प्रकाशित साहित्यिक या नाट्य कृति के यथोचित उद्धरणों का जनता के सुपठन के लिए प्रयोग।
  • किसी Teacher अथवा Student द्वारा प्रशिक्षण के लिए किसी कृति का पुनरूत्पादन।
  • किसी परीक्षा के प्रश्न-पत्रों में दिए जाने वाले प्रश्नों के लिए पुनरूत्पादन।
  • परीक्षा में प्रश्नों के उत्तरों के रूप में पुनरूत्पादन।
  • किसी शिक्षण संस्था के क्रियाकलापों में किसी साहित्यिक, नाट्य अथवा संगीतात्मक कृति का फिल्म, चलचित्र या ध्वन्यंकन के रूप में प्रस्तुतीकरण।

Copyright Board

प्रतिलिप्याधिकार बोर्ड कॉपीराइट संबंधी मामलों की सर्वोच्च संस्था है। यानि का यह Supreme Court (सर्वोच्च न्यायालय) की तरह काम करती है। जिसमें कॉपीराइट संबंधी मामलों का निपटारा किया जाता है। इसीलिए इसका अध्यक्ष उच्चत्तम न्यायालय का मौजूदा, भावी अथवा पूर्व न्यायाधीश (Judge) होता है।

अध्यक्ष के अलावा बोर्ड में दो और सदस्य होते हैं। साथ ही कई अधिकारी व कर्मचारी होते हैं, जो बोर्ड के काम-काज में मदद करते हैं। इन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति अध्यक्ष के परामर्श पर Central Government (केन्द सरकार) करती है।

Copyright Registration

कॉपीराइट रजिस्ट्रेशन के लिए प्रतिलिप्याधिकार कार्यालय में एक Copyright Register होता है। जिसमें कृति का नाम, शीर्षक, रचयिता का नाम, प्रकाशक का नाम, प्रकाशन की तारीख, कॉपीराइट धारक का नाम व पता, कृति की विशिष्टताऐं और अन्य जरूरी सूचनाएं दर्ज की जाती है। यह Register हमेशा Copyright Office में मौजूद रहता है। जिसमें Patent संबंधी जानकारी होती है।

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लेकिन सवाल यह है कि Patent के लिए क्या करना पड़ता है? तो यह बहुत ही आसान है। दरअसल किसी भी कृति को Patent करवाने के लिए आपको निर्धारित प्रारूप में एक आवेदन देना पड़ता है। यानि कृति का नाम, शीर्षक, प्रकाशन की तारीख, प्रकाशक का नाम, Copyright Holder का नाम, पता और अन्य चाही गई सूचनाऐं भरकर प्रतिलिप्याधिकार कार्यालय (Copyright Office) में जमा करवाना पड़ता है।

कॉपीराइट का उल्लंघन व सजा

अब बात करते हैं Punishment (सजा) की। यानि कि जब कोई कॉपीराइट के उल्लंघन का अपराध करता है। और उस पर Copyright Infringement का दोष साबित हो जाता है तो उसे क्या-क्या सजा मिल सकती है? आइए, जानते हैं :-

अगर कोई कॉपीराइट का उल्लंघन करता है, तो उसे कम से कम 6 माह और अधिकतम 3 साल तक की जेल और कम से कम 50,000 रूपये से अधिकतम 2,00,000 रूपये तक का जुर्माना भुगतना होगा।

अगर कोई एक बार अपराध करने के बाद दुबारा या बार-बार कॉपीराइट का उल्लंघन करता है। तो उसे हर बार कम से कम 1 साल और अधिकतम 3 साल तक की जेल, और कम से कम 1,00,000 रूपये और अधिकतम 2,00,000 रूपये तक का जुर्माना भुगतना होगा।

अगर कोई व्यक्ति किसी Computer Program की अतिलंघनकारी प्रति (Cracked, Mod वर्जन) का अपने Computer पर जानबूझकर उपयोग करेगा। उसे कम से कम 7 दिन और अधिकतम 3 साल तक की जेल, और कम से कम 50,000 रूपये से 1,00,000 रूपये तक का जुर्माना भुगतना होगा।

DMCA क्या है?

अगर आप एक Digital Content Creator हैं तो DMCA के बारे में जरूर जानते होंगे? क्योंकि यह एक ऐसा Copyright Law है, जो खास Digital Content Creators के लिए ही बनाया गया है। यह दरअसल ऑनलाइन कॉन्टेंट क्रिएटर्स के हितों की रक्षा करता है। हालांकि भारतीय Copyright Act 1957 से इसका कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन यह भी कॉपीराइट से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कानून है।

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DMCA का पूरा नाम Digital Millennium Copyright Act है। जिसे 1998 में अमेरिकी राष्ट्रपति Bill Clinton ने लागू किया था। इस कानून का मूल मकसद Digital Content को Protect करना है।

दरअसल DMCA की मदद से आप अपने Blog अथवा Website को Protect कर सकते हैं। और अपने Content को चोरी होने से बचा सकते हैं। अगर कोई आपका Content चोरी करके अपने Blog पर पब्लिश करता है। तो आप उसके खिलाफ Online DMCA Complaint दर्ज करवा सकते हैं। और उसके Blog से अपने Content को Remove करवा सकते हैं। 

कॉपीराइट : सारांश

कुल मिलाकर कॉपीराइट, बौद्धिक संपदा से जुड़ा एक Legal Right (कानूनी अधिकार) है। जो बौद्धिक संपदा को Intellectual Property के रूप में मान्यता देता है। यह Copyright Holder को उसके Original Work को Copy, Modify, Reproduce, Publish और Sell करने का अधिकार देता है। अगर कोई बिना अनुमति के किसी और का Work चोरी करता है। तो यह कॉपीराइट का उल्लंघन (Copyright Infringement) कहलाता है। और इसके लिए सजा का प्रावधान है।

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अगर कोई Copyright Infringement का दोषी पाया जाता है! तो उसे 6 महिने से 3 साल तक की जेल और 50,000 रूपये से 2,00,000 रूपये तक का जुर्माना हो सकता है। भारत में कॉपीराइट संबंधी मामलों का निस्तारण कॉपीराइट एक्ट 1957 के तहत गठित Copyright Board द्वारा किया जाता है। वहीं Copyright Registration, Patent और Trademarks संबंधी कार्यों के लिए Copyright Office उत्तरदायी होते हैं।

आपने क्या सीखा?

इस आर्टिकल के जरिए आपने जाना कि Copyright Act 1957 क्या है? इसके तहत कौन-कौनसी सामग्री संरक्षित (Protected) है? इसका उल्लंघन करने पर क्या होता है? Copyright Infringement का दोषी पाये जाने पर कौन-कौनसी सजाओं का प्रावधान है? Copyright Registration कैसे किया जाता है? Copyright Board क्या है? यह कैसे काम करता है? DMCA (Digital Millennium Copyright Act) क्या है? एक Content Creator के लिए इसका क्या महत्व है? और ऐसी ही और भी बहुत-सी जानकारियाँ, जो शायद आपके लिए काफी उपयोगी साबित होंगी।

यह आर्टिकल Copyright Act 1957 का एक संक्षिप्त ऑवरव्यू है। इसीलिए इसमें सिर्फ खास-खास बिन्दुओं को शामिल किया गया है। पूरा एक्ट पढ़ने के लिए Copyright Act 1957 In Hindi (PDF) पर क्लिक करें। उम्मीद है! यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। अगर पसंद आया तो इसे लाईक और शेयर कीजिए। और ऐसे ही और आर्टिकल्स के लिए ‘टेकसेवी डॉट कॉम’ को सब्सक्राइब कर लीजिए। ताकि जब भी हम कोई नया आर्टिकल पब्लिश करेंं, आपको उसकी सूचना मिल जाए!

अवश्य पढ़ें (खास आपके लिए) :-

“Copyright क्या होता है? कॉपीराइट अधिकारों का उल्लंघन एवं सजा” पर 3 विचार

    1. साहब लाल जी,
      असल में Disclaimer कोई कानून नहीं है। यह एक Statement (कथन) होता है। जो लेखक/क्रिएटर द्वारा ऐसी चीजों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिनका वह समर्थन नहीं करता। जैसे कि ड्रग्स, शराब, जुआ, हिंसा, अपराध, जानवरों पर अत्याचार, पायरेसी, किसी दूसरे व्यक्ति का कथन या मत आदि।

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