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Operating System क्या है? परिभाषा, प्रकार, कार्य, विशेषताएं

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अगर आप फोन या कम्प्यूटर इस्तेमाल करते हैं। तो आपने Android, iOS और Windows का नाम जरूर सुना होगा। ये दरअसल कुछ पॉपुलर ऑपरेटिंग सिस्टम्स हैं। जो स्मार्टफोन से लेकर कम्प्यूटर और ATM मशीन से लेकर Robots तक सबमें इस्तेमाल होते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि Operating System क्या होता है? और यह कैसे काम करता है? अगर नहीं, तो यह आर्टिकल खास आपके लिए है। क्योंकि इस आर्टिकल में इसी विषय पर विस्तार से जानकारी दी गई है।

Operating System

एक कम्प्यूटर सिर्फ Binary भाषा को समझता है। और उसी में Communicate करता है। लेकिन जब हम अपने Computer को कोई Command देते हैं। तो वह Binary भाषा में न होकर हिन्दी, English या फिर किसी और भाषा में होता है। लेकिन फिर भी कम्प्यूटर उसे समझ जाता है। और हमारा काम कर देता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर कम्प्यूटर हमारे Commands को समझता कैसे है? तो इसके लिए एक कम्प्यूटर को Operating System की जरूरत पड़ती है।

Operating System क्या है?

ऑपरेटिंग सिस्टम, एक System Software है, जो OS (ओएस) के नाम से भी जाना जाता है। यह असल में Programs का एक ऐसा सेट है, जिसमें कम्प्यूटर के लिए अनगिनत निर्देश होते हैं। जब आप कम्प्यूटर को कोई काम देते हैं, तो वह इन्हीं निर्देशों की मदद से उसे पूरा करता है। आपको बताना चाहूँगा कि ऑपरेटिंग सिस्टम कम्प्यूटर का Main Software होता है। जो बाकी सारे Softwares और Programs को चलाता है। जैसे कि Windows OS, VLC Player, Photoshop, MS Office आदि सॉफ्टवेयर्स को चलाता है।

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आमतौर पर ऑपरेटिंग सिस्टम, Keyboard, Mouse, Microphone आदि से Input लेता है। और उसे Screen पर Display करने के लिए Hardware के साथ Coordinate करता है। यानि कि Computer User और Computer Hardware के बीच सामंजस्य स्थापित करता है। और Communicate करने में मदद करता है। अगर आसान भाषा में कहें तो User की बात Computer को समझाता है। और कम्प्यूटर की बात यूजर को। इस तरह दोनों के बीच संवाद कायम करता है।

इसके अलावा ऑपरेटिंग सिस्टम, GUI (Graphical User Interface) मुहैया करवाता है। जिससे कम्प्यूटर यूज करना काफी आसान हो जाता है। क्योंकि Graphical User Interface में सारे ऑप्शन्स Menus, Icons, Bars और Buttons के रूप में दिखाई देते हैं। जिससे Command देना काफी आसान होता है। क्योंकि हरेक कमांड के लिए बार-बार Codes नहीं लिखने पड़ते।

OS कैसे काम करता है?

अब सवाल यह है कि Operating System काम कैसे करता है? तो वैसे तो आपको इसका अंदाजा हो गया होगा। लेकिन फिर भी, चलिए एक उदाहरण के माध्यम से समझते हैं। मान लीजिए कि आप अपने कम्प्यूटर में मौजूद एक Movie देखना चाहते हैं। और इसके लिए आप उस पर डबल क्लिक करते हैं। तो जैसे ही आप डबल क्लिक करेंगे, ऑपरेटिंग सिस्टम Mouse के जरिए Input ग्रहण करेगा। और तुरन्त Hardwarw के साथ सामंजस्य स्थापित करेगा।

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यानि कि Movie को Play करने के जिन-जिन Resources की जरूरत पड़ेगी, वे सब उपलब्ध करवाएगा। जैसे कि VLC Player, Speaker, Volume Buttons का Control आदि। इस तरह आपकी Favorite Movie आपकी कम्प्यूटर स्क्रीन पर Display हो जाएगी। और आप उसे देख पाऐंगे। कुल मिलाकर ऑपरेटिंग सिस्टम, Software और Hardware को Manage करके कम्प्यूटर को सही ढंग से काम करने में मदद करता है।

Operating System के प्रकार

आपको बताना चाहूँगा कि Operating Systems कई तरह के होते हैं। जैसे कि उपयोग के आधार पर, Tasking के आधार पर, और Data Processing के आधार पर OS के अलग-अलग प्रकार हैं। आइए, जानते हैं ऑपरेटिंग सिस्टम के मुख्य प्रकारों के बारे में। Types of operatng system :-

1. Batch Processing Operating System (BPOS)

इस ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग ऐसे कार्यों में किया जाता है। जहाँ कम समय में ज्यादा Data Process करने की जरूरत पड़ती है। क्योंकि यह Data को Batches के रूप में Process करता है। यानि कि Similar Data को Batches (बंडलों) के रूप में Execute किया जाता है। और यह प्रोसेस पूरी तरह ऑटोमेटिक होती है।

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BPOS उपयोकर्ता, अपने Computer से सीधे सम्पर्क नहीं करता। बल्कि Offline काम करता है। और जब काम पूरा हो जाता है, तो Computer Operator के पास भेज देता है। उसके बाद कम्प्यूटर ऑपरेटर एक जैसे Data के Batches बनाता है। और उन्हें Group में Execute करता है। इस ओपरेटिंग सिस्टम को ऐसे कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है। जहाँ बड़ी मात्रा में डाटा को प्रोसेस करना होता है।

2. Time Sharing Operating System

इस ऑपरेटिंग सिस्टम की मदद से एक समय में मल्टीपल यूजर्स, मल्टीपल Tasks कर सकते हैं। इसीलिए इसे Multitasking Operating System भी कहा जाता है। हालांकि इसमें सारे यूजर्स मिलकर एक ही System को इस्तेमाल करते हैं। लेकिन चूँकि प्रत्येक टास्क को एक निश्चित Time दिया जाता है। इसीलिए सभी Users को बराबर मौका मिलता है।

अगर आसान भाषा में कहें तो इसमें CPU Time को यूजर्स के बीच Share किया जाता है। और प्रत्येक Task को बराबर Time दिया जाता है, जिसे Time Quantum कहा जाता है। जब एक टास्क पूरा हो जाता है तो दूसरे Task को Execute किया जाता है। और उसके बाद तीसरे, चौथे, पाँचवे को… इस तरह एक के बाद एक सभी Tasks श्रृंखलाबद्ध तरीके से Execute किए जाते हैं। 

3. Distributed Operating System

डिस्ट्रीब्यूटेड ऑपरेटिंग सिस्टम में कई सारे Systems होते हैं। जो एक Network के रूप में काम करते हैं। इसमें सारे Systems एक Shared Communication Network के जरिए आपस में जुड़े हुए होते हैं। और मिलकर काम करते हैं। साथ ही प्रत्येक सिस्टम के पास अपना CPU, Primary Memory, Secondary Memory और बाकी सारे Resources होते हैं। इसलिए प्रत्येक सिस्टम Individually भी काम कर सकता है।

4. Multiprocessing Operating System

इसमें एक ही Task को Multiple Processors मिलकर पूरा करते हैं। इसीलिए इसे Multiprocessor Operating System भी कहा जाता है। हालांकि यह नॉर्मल यूजर्स के लिए नहीं है। क्योंकि नॉर्मल यूजर्स को इतनी ज्यादा Computing Power की जरूरत ही नहीं पड़ती। तो फिर यह किसके लिए बना है? और इसे कहाँ इस्तेमाल किया जाता है? Where is multiprocessing operating system used? तो इसका इस्तेमाल असल में Supercomputers में होता है।

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क्योंकि इसकी Computing Power और Speed अकल्पनीय है। साथ ही इसका काम करने का तरीका एकदम अलग है। यह एक Task को सारे कई Sub Tasks में बांटता है। और फिर हर सब-टास्क को अलग-अलग CPU से पूरा करवाता है। इसीलिए बहुत कम समय में Task Complete हो जाता है।

5. Network Operating System

यह एक Server Based Operating System है। जिसमें कई सारे Computers मिलकर एक Network के रूप में काम करते हैं। यानि कि सारे कम्प्यूटर्स एक Private Network के जरिए आपस से Connected होते हैं। और एक ही Server पर काम करते हैं। इसीलिए Server में मौजूद Data को सारे कम्प्यूटर्स Access कर सकते हैं। बस उनके पास Login ID और Password होना चाहिए।

अगर आप कभी Bank गए हैं तो आपने देखा होगा कि वहाँ कई सारे कम्प्यूटर्स होते हैं। और सभी कम्प्यूटर्स एक ही Server से Connect होते हैं। इसीलिए जब आप अपने Bank Account से जुड़ा कोई काम करवाने जाते हैं। तो वहाँ Manager से लेकर Cashier तक हर कोई आपका Account एक्सेस कर सकता है।

6. Real Time Operating System (RTOS)

रियल टाईम ओएस एक Advanced Operating Sysem है। जो Data को Real Time में प्रोसेस करता है। इसकी मदद से बेहद कम समय में बहुत ही ज्यादा और महत्वपूर्ण काम किया जा सकता है। खासकर तब, जब Calculations महत्वपूर्ण हों और समय बहुत ही कम। जैसे कि Satellite Launch करते वक्त या फिर Guided Missiles को ऑपरेट करते वक्त इसकी सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है।

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Real Time OS दो प्रकार के होते हैं। एक Hard Real Time Operating System और दूसरा Soft Real Time Operating System. अब आप कहेंगे कि इन दोनों में फर्क क्या है? तो फर्क बस इतना है कि Hard Real Time OS वक्त का पाबंद होता है। यानि कि हर काम दिए गए वक्त में काम पूरा करके देता है। जबकि Soft Real Time OS वक्त का इतना ज्यादा पाबंद नहीं होता।

7. Embedded Operating System

यह ऑपरेटिंग सिस्टम Non-Computer Devices के लिए बनाया गया है। अर्थात उन डिवाइसेज के लिए, जो कम्प्यूटर नहीं हैं। जैसे कि Lifts, Petrol Pumps, ATM Machines, POS Machines, Phones, Smartwatches आदि। इन सभी डिवाइसेज में Embedded OS का इस्तेमाल होता है। एम्बेडेड ऑपरेटिंग की खास बात यह है कि यह डिवाइस के हिसाब से बनाया जाता है। यानि कि जिस डिवाइस के लिए बनाया जाता है, सिर्फ उसी में काम करता है।

Operating System के कार्य

अब सवाल यह है कि ऑपरेटिंग सिस्टम करता क्या है? इसके मुख्य कार्य कौन-कौनसे हैं? तो ऑपरेटिंग सिस्टम असल में कई सारे काम करता है। यहाँ तक कि पूरे Computer को चलाता है। लेकिन फिर भी इसके कुछ मुख्य Functions हैं, जो बहुत महत्वपूर्ण हैं। पेश हैं Main functions of operating system :-

1. Memory Management

एक Computer में दो तरह की मैमोरी होती है। एक Primary Memory और दूसरी Secondary Memory. प्राइमरी मैमोरी में RAM (Random Access Memory) और ROM (Read Only Memory) शामिल होती है। वहीं सैकंडरी मैमोरी में Hard Disk, CD, DVD और दूसरी चीजें आती हैं। जब आप अपने कम्प्यूटर में कोई Software (जैसे कि Photoshop, MS Office आदि) ओपन करते हैं। तो उसे Memory की जरूरत पड़ती है।

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लेकिन जब आप Multiple Programs रन करते हैं। तो हर प्रोग्राम को अलग से मैमोरी की जरूरत पड़ती है। ऐसे में किस प्रोग्राम को कितनी RAM देनी है और कितनी ROM? यह Operating System ही Decide करता है। साथ ही नये शुरु होने वाले प्रोग्राम्स को Memory Allocate करना और बंद होने वाले प्रोग्राम्स से Memory वापिस लेना भी ऑपरेटिंग सिस्टम का ही काम है।

अगर आसान भाषा में कहें तो ऑपरेटिंग सिस्टम, कम्प्यूटर में चलने वाले तमाम Programs को Memory Distribute करता है। और उसका लेखा-जोखा रखता है। यानि प्रत्येक प्रोग्राम को Track करता है। और पता लगाता है कि कौनसा प्रोग्राम कहाँ क्या कर रहा है? और कितनी मैमोरी यूज कर रहा है?

2. CPU Management

कम्प्यूटर में चलने वाले प्रत्येक प्रोग्राम को CPU (Processor) Power की जरूरत पड़ती है। और इसके लिए वह पूरी तरह Operating System पर निर्भर होता है। क्योंकि CPU Management का काम ऑपरेटिंग सिस्टम ही देखता है। इसीलिए किस Process या Task को Processor देना है? और कितनी देर के लिए देना है? यह ऑपरेटिंग सिस्टम ही Decide करता है। किसी Specific Task को Processor Allocate करना Processor Scheduling कहा जाता है?

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इसके अलावा ऑपरेटिंग सिस्टम, CPU की हर गतिविधि को Track करता है। और उसका रिकॉर्ड रखता है। यानि कि सीपीयू कहाँ और किस काम में इस्तेमाल हो रहा है? कौन-कौनसे Tasks Perform कर रहा है? कौन-कौनसे टास्क पूरे हो चुके हैं? और कौन-कौनसे टास्क चल रहे है? इसका कंपलीट लेखा-जोखा रखता है। और Traffic Controller की मदद से CPU के Status से अवगत करवाता रहता है।

3. File Management

एक कम्प्यूटर में अनगिनत Files होती हैं। इसीलिए किसी Particular File को ढूँढना नाकों चने चबाने जैसा होता है। यानि कि बहुत ही मुश्किल काम। लेकिन इस मुश्किल काम को आसान बनाता है ऑपरेटिंग सिस्टम। कैसे? दरअसल ऑपरेटिंग सिस्टम Files को अगल-अलग Folders और Directories के रूप में व्यवस्थित रखता है। और प्रत्येक फाईल का रिकॉर्ड रखता है। जैसे कि Name, Size, Format, Location आदि।

4. Device Management

आमतौर पर एक Computer को कई सारे Devices के साथ काम करना पड़ता है। जैसे कि Keyboard, Mouse, Printer, Mic, Speaker, WebCam, Storage Devices, Wireless Devices, Monitors आदि। लेकिन इन सारे Devices को कम्प्यूटर के साथ Communicate करने के लिए Coordinaton की जरूरत होती है। क्योंकि बिना कोऑर्डिनेशन के कोई भी डिवाइस ठीक से काम नहीं कर सकता। इसीलिए ऑपरेटिंग सिस्टम की जरूरत पड़ती है।

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क्योंकि ऑपरेटिंग सिस्टम, हर Devices को कम्प्यूटर के साथ Communicate करने में मदद करता है। और उसे तमाम जरूरी संसाधन मुहैया करवाता है। साथ ही कम्प्यूटर से Connected सभी Devices को Manage करता है। और उनमें Resources का बंटवारा करता है। अगर आपके कम्प्यूटर में OS नहीं होगा, तो वह किसी भी Device को सपोर्ट नहीं करेगा।

5. Play Mediator’s Role

ऑपरेटिंग सिस्टम, कम्प्यूटर और यूजर के बीच Mediator की भूमिका निभाता है। यानि कि यूजर की बात कम्प्यूटर को समझाता है। और कम्प्यूटर की बात यूजर को। इस तरह दोनों के बीच संवाद स्थापित करने में मदद करता है। हालांकि इसके बारे में उपर बात कर चुके हैं। इसीलिए ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं है।

6. Improve Performance

ऑपरेटिंग सिस्टम, कम्प्यूटर की Performance पर लगातार नजर रखता है। और उसे Improve करने की कोशिश करता रहता है। इसके लिए वह प्रत्येक Service Request और उसके Response में लगने वाले Time को रिकॉर्ड करता है। और System Health को Monitor करता है। अगर System Response Time स्लो होता है या फिर System में कोई गड़बड़ी पाई जाती है। तो ओएस उसके बारे में तुरन्त सूचित कर देता है।

7. Secure The System

हर यूजर अपने कम्प्यूटर में अपना बहुत सारा Personal Data Store करके रखता है। और कोई भी यह नहीं चाहता कि उसके कम्प्यूटर से Data चोरी हो जाए। या उसका Computer Hack हो जाए। क्योंकि डाटा की कीमत सबको पता है। इसीलिए हर यूजर अपने Data की सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करता है।

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लेकिन आपको बताना चाहूँगा कि Operating System भी इसमें आपकी पूरी मदद करता है। यानि कि आपके System को Secure रखने के लिए कई सुरक्षा फीचर्स मुहैया करवाता है। जैसे कि Password Protection और Firewall को ही ले लीजिए। इनकी मदद से आप अपने Computer में Unauthorized Users को प्रवेश करने से रोक सकते हैं।।

8. Job Accounting

ऑपरेटिंग सिस्टम, हर User और हर Task का रिकॉर्ड रखता है। जैसे कि किस यूजर ने कब लॉगिन किया? कब, कौनसा Task Perform किया? कौन-कौनसे Programs को यूज किया? और किस प्रोग्राम को कितनी देर यूज किया? इसी तरह प्रत्येक यूजर की प्रत्येक एक्टिविटी का सिलसिलेवार ब्यौरा इकट्ठा करता है। और यह डाटा Resources और Users को Track करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

9. Error Detection

जब आपके Computer में कोई दिक्कत आती है तो Operating System आपको बता देता है। साथ ही उसे Fix करने का विकल्प और तरीका भी बता देता है। यहाँ तक कि आपको Guide करके उस Problem को Fix भी कर देता है। जिसे Troubleshooting कहा जाता है। यह आपको हर ऑपरेटिंग सिस्टम में देखने मिल जाता है।

10. Graphical User Interface

अगर आप कम्प्यूटर के बारे में ठीक-ठाक जानकारी रखते हैं। तो आपको CLI (Command Line Interface) और GUI (Graphical User Interface) के बारे में जरूर पता होगा। ये दरअसल दो अलग-अलग यूजर इंटरफेस हैं। जो कम्प्यूटर को Operate करने के लिए इस्तेमाल होते हैं। पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम्स Command-Line Interface के साथ आते थे। इसीलिए उन्हें इस्तेमाल करना काफी मुश्किल होता था। क्योंकि हर कमांड के लिए अलग-अलग Codes लिखने पड़ते थे।

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लेकिन आज के दिन करीब-करीब ऑपरेटिंग सिस्टम्स Graphical User Interface के साथ आते हैं। जिनमें Menus, Bars, Icons और Buttons का प्रयोग होता है। इसीलिए कमांड देने के लिए सिर्फ Mouse से Click करना पड़ता है। यानि कि हर कमांड के लिए अलग-अलग Codes नहीं लिखने पड़ते। हालांकि Linux OS में अभी भी Command Prompt इस्तेमाल होता है। जिसे Terminal, Shell और Console जैसे नामों से जाना जाता है। लेकिन इसके साथ GUI भी मिलता है। यानि कि यह CLI और GUI का मिश्रण है।

ऑपरेटिंग सिस्टम का मुख्य उद्देश्य कम्प्यूटर के इस्तेमाल को आसान बनाना है। और इसके लिए Graphical User Interface सबसे बेस्ट है। क्योंकि इसकी मदद से कोई भी Computer Use कर सकता है। इसके लिए Command Codes की किताब लेकर नहीं बैठना पड़ता।

Operating System की विशेषताऐं

अब सवाल यह है कि एक ऑपरेटिंग सिस्टम की क्या-क्या विशेषताऐं होती हैं? या यूँ कहें कि एक ऑपरेटिंग सिस्टम की मुख्य विशेषताऐं कौन-कौनसी हैं? तो आइए, जानते है ऑपरेटिंग सिस्टम की मुख्य विशेषताओं के बारे में। The Top-10 Characteristics of operating system :-

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  1. ऑपरेटिंग सिस्टम, यूजर को ग्राफिकल यूजर इंटरफेस प्रदान करता है। जो Computer के इस्तेमाल को आसान (Easy To Use) बनाता है।
  2. ऑपरेटिं सिस्टमग विभिन्न Hardware Components के साथ Coordinate करता है। और हर Hardware Device के साथ उसी की भाषा में Communicate करता है। इसके लिए यह एक खास Translation Software का इस्तेमाल करता है। जिसे Device Drivers के नाम से जाना जाता है।
  3. ऑपरेटिंग सिस्टम, विभिन्न Softwares को Run करने के लिए एक Environment प्रदान करता है। और प्रत्येक Software को जरूरी संसाधन मुहैया करवाता है।
  4. ऑपरेटिंग सिस्टम, Primary Memory, Secondary Memory और CPU को मैनेज करता है। और विभिन्न Programs और Tasks को Memory और CPU Power डिस्ट्रीब्यूट करता है।
  5. यह एक कम्प्यूटर में मौजूद तमाम Files को  मैनेज करता है। और उन्हें Directories के रूप में व्यवस्थित रखता है। साथ ही Files और Folders को Copy, Move, Rename और Delete करने की सुविधा देता है।
  6. यह System Health को Monitor करता है। और Performance को Improve करने में मदद करता है।
  7. यह Hardware और Software दोनों को Manage करता है। और इनके बीच तालमेल बिठाकर Computer और अन्य Programs को सही ढंग से चलाने में मदद करता है।
  8. यह Password, Firewall और अन्य तकनीकों की मदद से System को Secure रखने में मदद करता है। और Errors तथा Malwares के बारे में जानकारी देता है। साथ ही Errors को Fix करने में भी मदद करता है।
  9. यह Computer User और Computer Hardware के बीच सामंजस्य बिठाता है। और Communicate करने में मदद करता है। 
  10. यह एक कम्प्यूटर के तमाम उपयोगकर्ताओं और उनके द्वारा Perform किए गए Tasks का रिकॉर्ड रखता है। और प्रत्येक यूजर की प्रत्येक एक्टिविटी का तारीख और समयवार ब्यौरा रखता है। यानि कि एक तरह से पूरी Logbook Maintain करके रखता है।

प्रमुख Operating Systems

अब सवाल आता है दुनिया के टॉप ऑपरेटिंग सिस्टम्स का। तो वैसे तो आप Android, iOS और Windows का नाम कई बार सुन चुके होंगे। क्योंकि ये सबसे Popular Operating Systems हैं। लेकिन इनके अलावा भी कई ऑपरेटिंग सिस्टम्स हैं, जिनके बारे में आपको जरूर जानना चाहिए। तो आइए, जानते हैं Top Operating Systems For PC और Top Operating System For Mobile के बारे में।

1. Windows

यह दुनिया का सबसे पॉपुलर और सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने PC OS है। जिसके बारे में हर कोई जानता है। हालांकि वैसे तो अभी तक विंडोज के कई सारे Versions आ चुके हैं। लेकिन Windows XP, Windows 7, 8 और 10 सबसे पॉपुलर वर्जन्स हैं। Windows 10 सबसे लेटेस्ट वर्जन है। हालांकि विंडोज का मोबाइल वर्जन (Windows Mobile) भी लॉन्च किया गया था। लेकिन ज्यादा चला नहीं। अगर आपने Nokia Lumia सीरीज के Phones इस्तेमाल किए हैं। तो आपको अच्छी तरह मालूम होगा।

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Windows Microsoft का सबसे सफलतम उत्पाद है। जिसकी वजह से माइक्रोसॉफ्ट की एक अलग पहचान है। लेकिन यह Microsoft की इकलौती पहचान नहीं है। इसके अलावा एक दूसरी पहचान भी है, जो Bill Gates के साथ जुड़ी हुई है। बिल गेट्स असल में दुनिया के सबसे अमीर व प्रभावशाली लोगों में से है। और Microsoft के मालिक हैं।

2. MacOS

पीसी ऑपरेटिंग सिस्टम्स में MacOS का एक महत्वपूर्ण स्थान है। यह Windows के बाद दूसरा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला PC OS है। यह आपको Apple के Laptops और Desktops जैसे कि MacBook, iMac आदि में देखने को मिलता है। इसे Macintosh के नाम से भी जाना जाता है।

3. Linux

Linux एक Free और Open-Source Operating System है। जिसे आप फ्री में इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि मूल रूप से यह एक PC OS है। लेकिन PC के साथ-साथ यह Mobile, Smart TV, Gaming Console और कई दूसरे Devices में भी इस्तेमाल होता है। इसकी पॉपुलैरिटी का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं! कि दुनिया के Top-500 Supercomputers में से ज्यादातर सुपर कम्प्यूटर्स Linux OS पर काम करते हैं।

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अगर सुरक्षा से लिहाज से देखें तो लिनक्स एक Virus-Free Operating System माना जाता है। यानि कि इसमें Virus, Trojans और Ransomwares के हमले नहीं होते। इसीलिए यह बाकी ऑपरेटिंग सिस्टम्स की तुलना काफी ज्यादा Secure है। आपको बताना चाहूँगा कि Linux के कई सारे Distributions हैं। जो अलग-अलग Hardware Requirements के हिसाब डिजायन किए गए हैं। इसीलिए यह तरह के कम्प्यूटर में Smoothly काम करता है।

4. ChromeOS

क्रॉम ओएस का नाम सुनकर आपको Chrome Browser की याद आ रही होगी। लेकिन यह ब्राउजर नहीं है। बल्कि एक ऑपरेटिंग सिस्टम है, जो Google द्वारा डिजायन किया गया है। हालांकि वैसे तो यह एक PC OS है, लेकिन असल में PC और Mobile OS का Mixture है। इसीलिए इसकी मदद से आप पीसी में भी Android Apps यूज कर सकते है।

5. Android

Android दुनिया का सबसे पॉपुलर और सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला Mobile Operating System है। जो हर दूसरे फोन में देखने को मिल जाता है। अगर Market Share के हिसाब से देखें तो एंड्रॉयड 71% शेयर के साथ पहले नम्बर पर है। यह आंकड़ा सिर्फ Mobile OS Industry का है।

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एंड्रॉयड Linux Kernel पर आधारित एक Mobile OS है। जो मुख्य रूप से Touchscreen Smartphones और Tablets के लिए डिजायन किया गया है। हालांकि अब तक एंड्रॉयड के कई सारे वर्जन्स आ चुके हैं। लेकिन Android 4.4 (Kitkat) Android 5 (Lollipop), Android 9 (Pie) और Android 10 कुछ पॉपुलर वर्जन्स हैं। Android 12 सबसे लेटेस्ट वर्जन है, जो अभी Developer Phase में हैं।

6. iOS

आईओएस, एंड्रॉयड के बाद दूसरा सबसे पॉपुलर Mobile OS है। जो सिर्फ Apple के Phones में ही देखने को मिलता है। हालांकि iOS एक Abbreviation है जिसका फुल फॉर्म iPhone Operating System है। यह असल में एक Unix-like ऑपरेटिंग सिस्टम है, जो Darwin (BSD) पर आधारित है। यह मुख्य रूप से iPhone, iPad और iPods में इस्तेमाल होता है।

7. BlackberryOS

ब्लैकबेरी ओएस एक पॉपुलर मोबाइल ओएस है। जो Blackberry-Line के स्मार्टफोन्स में देखने को मिलता है। हालांकि अब यह बंद हो चुका है। लेकिन एक जमाने में काफी पॉपुलर ऑपरेटिंग सिस्टम हुआ करता था। खासकर तब, जब Blackberry के Phones बहुत ही डिमांड में रहा करते थे। लेकिन आज सच्चाई यह है कि Blackberry OS (Blackberry Operating System) बंद हो चुका है।

8. Symbian

एक जमाना था जब Phone का मतलब सिर्फ Nokia होता था। यानि कि नोकिया, दुनिया का नं.1 मोबाइल ब्रांड था। और Symbian (सिम्बियन) दुनिया का No.1 Mobile Operating System. लेकिन जैसे ही Android आया, Symbian पिछड़ता चला गया। और नतीजा यह रहा कि आज न तो नोकिया है, और न ही सिम्बियन। दोनों खत्म हो गए।

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लेकिन इसके बाद Nokia को फिर से जीवित करने की कोशिश की गई। एक बार, Microsoft द्वारा और दूसरी बार HMD Global द्वारा। लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ। हालांकि आज के दिन HMD Global नोकिया के Android Phones बना जरूर रही है। लेकिन नोकिया का वो रुतबा नहीं है, जो Android के आने से पहले था।

Operating System : Summary

कुल मिलाकर Operating System एक बेहद जरूरी और आधारभूत सॉफ्टवेयर है। जो बाकी Softwares के लिए जमीन उपलब्ध करवाता है। यानि कि उन्हें Proper Space और तमाम जरूरी संसाधन मुहैया करवाता है। इसीलिए ऑपरेटिंग सिस्टम को Main Software कहा जाता है। यह असल में कम्प्यूटर का दिल होता है, जो कम्प्यूटर को जिंदा रखता है।

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ऑपरेटिंग सिस्टम, कम्प्यूटर के सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर मैनेज करता है। Memory और CPU को मैनेज करता है। File System को मैनेज करता है। कम्प्यूटर की Performance और Security को Improve करता है। यूजर और हार्डवेयर के बीच संतुलन बनाकर रखता है। External Devices को मैनेज करता है। Bugs और Errors का पता लगाता है। और प्रत्येक यूजर की प्रत्येक एक्टिविटी का रिकॉर्ड रखता है।

Operating System In Hindi

उम्मीद है इस आर्टिकल के जरिए आपको Operating System Kya Hai? और यह कैसे काम करता है? इसके बारे में उपयोगी जानकारी मिली होगी। साथ OS के प्रकार, कार्य, विशेषताऐं और मुख्य Operating Systems के बारे में काफी कुछ नया जानने को मिला होगा। अगर यह आर्टिकल आपको पसंद आया, तो इसे Like और Share जरूर कीजिए। साथ ही टेकसेवी डॉट कॉम को Subscribe कर लीजिए। ताकि जैसे ही हम कोई नया आर्टिकल पब्लिश करें, आपको सूचना मिल जाए।

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